क्यों लेबर के दौरान महिलाएं खुद को लाचार महसूस करती हैं

सीमा साक्या, इनके पहले बच्चे का जन्म अमेरिका में हुआ था, लेकिन जब यह दूसरी बार प्रेगनेंट हुई तो इनकी डिलवरी बैंगलोर में हुई। इन्होंने कहा कि “ बोस्टन में, मैं अपने पहले बच्चे के जन्म के लिए एक बर्थिंग सेंटर को चुना था। वहीं इंडिया में, कनविनिेंसस के तौर पर हॉस्पिटल में एक मैटर्निटी वार्ड का होना मुश्किल है। क्योंकि, मैंने अपने कुछ दोस्तों को यहाँ बच्चे की डिलवरी होते देखा है, जिसके बारे में बताना काफी है,” इसके अलावा सीमा साक्या ने यह भी कहा कि, उनका पहला बच्चा 35 साल  में हुआ था। “ जब मैं इंडिया वापस आई तब मेरा दुसरे बेबी को लेकर कोई प्लान नहीं था, लेकिन जब मुझे पता चला कि मैं दुबारा से प्रेगनेंट हूँ, तो यह सुनकर मैं काफी चिंतित हो गई। क्योंकि, अमेरिका जैसी बर्थिंग सेंटर यहाँ नहीं था। लेकिन, मैंने एक बर्थिंग प्लान बनाया, जो कि मेरे प्रसव के लिए एक ठोस कदम था। हालाँकि, बर्थ से एक ही मतलब था और वह था जेंटल प्रोसेस, जहां कोई स्क्रीमिंग न हो और न ही बच्चे अचानक से माँ के गर्भ से बाहर निकल आएं। ऐसे में सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था,” ऐसा उन्होंने कहा।

यदि, एक मीडिया की भाषा में कोई महिला बच्चे को जन्म देती है, तो वह बेहद असहाय, बेड पर लेटी हुई खुद को पाती हैं, जहाँ उसके इर्द-गिर्द डॉक्टर खड़े होते हैं, और चाह कर भी खुद के लिए कुछ नहीं कर पाती हैं। जो कि वास्तव में एक बच्चे के जन्म देने की वास्तविकता से बहुत दूर है। वहीं दूसरी तरफ ट्रेडिशनल हॉस्पिटल में ज्यादातर आपको चुप रहना पड़ता है, या फिर कोई मालिश वाली आपके पीछे खड़ी हो।

ज्यादातर महिलाएं जो मैटर्निटी केयर को लेने में सक्षम हैं, वह प्रसव के दौरान कम्फ़र्टेबल रहना चाहती हैं। क्योंकि, पोस्ट-पार्टम बहुत ही महत्व्पूर्ण माना जाता है, लेकिन इसके लिए शारीरिक परेशानी, दर्द के साथ घबराहट और, कुछ मामलों में, भय का सामना करने जैसी बातों पर ध्यान देना होता है।

भारत में एक बच्चे को जन्म देने की चिंता साक्या के लिए मान्य था। उन्होंने कहा कि “ मुझे कुछ ज्यादा उम्मीदें नहीं थी; कि अमेरिका जैसी सुविधाएं मुझे यहाँ मिलेंगी लेकिन, कुछ चीज़ें मैं खुद के नियंत्रण में चाहती थी, न कि उन भारतीय महिलाओं की तरह जो इसके दर्द से गुजरती हैं। खासकर मैं यह सब चीज़ें बिलकुल बर्दास्त नहीं कर सकती थी, जैसे यहाँ के लोग पीठ के बल लिटा देते हैं और महिलाएं दर्द से कराह रही होती हैं, और न ही मैं अपने इस प्रसव के प्रक्रिया के दौरान अपने पति को बाहर रख सकती हूँ”। उन्होंने ने मेटर्निटी हॉस्पिटल पर काफी रिसर्च किया, जिसमें से उन्होंने ने क्लाउड-नाइन को चुना। उन्होंने कहा कि “ मुझे इसकी परवाह नहीं थी  कि मुझे हॉस्पिटल वाले केक दें या मेरे गाड़ी के पीछे बलून लगाएं, बल्कि, मुझे मेरे बर्थिंग प्लान बनाने के लिए दिया जाए, ताकि मैं अपने बर्थ को कंट्रोल कर सकूँ”। इसके अलावा उन्होंने कहा कि वाटर ब्रोक के बाद भी मुझे हर वह एक चीज़ की पुष्टि होनी चाहिए, जिसका मुझे संदेह है। “ यहाँ तक कि स्त्री रोग देखभाल अपने शीर्ष पायदान पर ही क्यों न हो, लेकिन डिलीवरी प्रोसेस हमेशा अच्छा होना चाहिए, कन्फ्यूजन और प्लान सब बाहर होनी चाहिए”।

हालाँकि, वह बिल्कुल सरप्राइज थी कि कुछ चीज़ों को लेकर, जो उन्होंने प्रसव के दौरान सोचा था, उससे कहीं बेहतर हुआ। उन्होंने कहा कि “कुछ चीजें जो मेरे लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण थी, और वह थी कि प्रसव के दौरान मुझे चारों ओर टहलने दिया गया, न कि बेड पर पीठ के बल लिटाया गया। इसके अलावा मुझे नीचे अपने घुटनों के बल आने के लिए कहा गया, जैसा कि मुझे मेरे पहले बेबी के जन्म के दौरान अमेरिका के हॉस्पिटल में कहा गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि मेरे पसंदीदा गाने चलाए गए, और पानी पिने दिया गया जो कि मेरे लिए बहुत महत्व्पूर्ण था। डिलवरी के बाद मेरा इतने अच्छे से केयर किया गया कि मैं आपको बता नहीं सकती, यह मेरे सपने के सच होने से कम नहीं था”। अंत में उन्होंने कहा कि “ मैंने तीसरे बच्चे के बारे में नहीं सोचा है, लेकिन हाँ अपने सभी फ्रेंड को यह सलाह दूंगी कि प्रसव के लिए क्लाउड-नाइन एक बेहतर विकल्प है”।

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