क्यों खास है शिशु के जन्म के बाद के 40 दिन ?

महिलाओं को न केवल गर्भावस्था के दौरान खुद का ख्याल रखना पड़ता है बल्कि प्रसव के बाद भी कुछ बातें हैं जिसका विशेस तौर पर ध्यान दिया जाना चाहिए। क्योंकि, एक बच्चे को जन्म देना इतना आसान काम नहीं है, इस दौरान मांशपेशियां शिथिल पड़ जाती हैं। इसलिए शुरुआत के 40 दिनों तक कुछ खास देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में, निचे कुछ बातें बताई जा रही हैं, जिसका एक माँ को ध्यान रखना चाहिए जिनमें निम्न शामिल हैं- (यह आर्टिकल बेबी सेंटर से लिया गया है)

नींद पूरी होना भी है जरुरी

नई माँ के लिए अच्छी तरह नींद ले पाना मुश्किल हो सकता है। मगर, अपनी एकांतवास अवधि का फायदा उठाएं और शिशु के सो जाने पर आप भी सो जाएं। हो सकता है आपको लगे कि यह थका देने वाला समय शायद कभी खत्म ही नहीं होगा। मगर, जब आपके शिशु की नींद की दिनचर्या तय हो जाएगी, तो सब आसान लगने लगेगा।

प्रसवोत्तर मालिश

प्रसव के बाद मालिश करवाना भारतीय पारंपरिक एकांतवास अवधि की सबसे शानदार चीजों में से एक है। मालिश से आपके थके हुए शरीर को काफी राहत मिलेगी और यह आपके रक्त संचार में भी सुधार लाती है।  

प्रसव के बाद के भोजन

भारत के हर क्षेत्र में एकांतवास के अपने पसंदीदा भोजन होते हैं।  ये अक्सर उन सामग्रियों से बनाए जाते हैं, जिन्हें गर्माहट प्रदान करने वाला माना जाता है। यह मान्यता है कि गर्माहट देने वाले भोजन प्रसव के बाद जल्दी ठीक होने में मदद करते हैं। काफी सारी सामग्रियां स्तन दूध की आपूर्ति बढ़ाने में भी सहायक मानी जाती हैं।

स्तनदूध बढ़ाने के लिए पेय

माना जाता है कि कुछ विशिष्ट पेय स्तनदूध के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। इसलिए उन्हें नई माँ के दैनिक आहार का हिस्सा बना दिया जाता है।

टांकों की देखभाल करें

अपने टांकों को ठीक करने के लिए आप बहुत कुछ कर सकती हैं, जैसे कि:

  • अगर आपके पेरिनियम क्षेत्र में शल्य चीरा (एपिसियोटमी) लगा है, तो निस्संक्रामक (डिसइंफेक्टेंट) मिलाकर गर्म पानी के टब में बैठें। यह टांके लगे क्षेत्र में आराम पहुंचाता है और दर्द से राहत देता है।

  • ठंडक, पीड़ादायक क्षेत्र को सुन्न कर देती है और सूजन भी कम करती है। आप तौलिये में आइसपैक लपेटकर उसे आराम से अपने टांकों पर रखें।

  • टांकों को इनफेक्शन से बचाने के लिए नियमित रूप से निस्संक्रामक क्रीम लगाएं।

सहजता से स्तनपान कराएं

हालांकि, स्तनपान करवाना शिशु को पोषण देने का सबसे प्राकृतिक तरीका है, मगर यह नई माँओं के लिए हमेशा इतना आसान नहीं होता। आपको शुरुआत में मुश्किलें हो सकती हैं। अतिपूरित या भरे हुए स्तन, चुचूकों (निप्पल) में पीड़ा या रिसाव होना एकदम सामान्य है।

श्रोणि मांसपेशियों के व्यायाम

शिशु के जन्म के बाद, हो सकता है आपके श्रोणि मंजिल (पेल्विक फ्लोर) में खरोंच, सूजन और काफी दर्द हो।

हालांकि, इस समय श्रोणी की मांसपेशियों के व्यायाम आप शायद ही करना चाहें, मगर ये आपकी निम्न तरीके से मदद कर सकते हैं:

  • आपके पेरिनियम क्षेत्र और योनि को ठीक होने में मदद

  • पेशाब के आकस्मात रिसाव से बचाव

  • पेरिनियम क्षेत्र में रक्त संचरण को सुधारना और सूजन व असहजता के प्रभाव को कम करना

अपने लिए भी समय निकालें

अत्याधिक व्यस्त नौकरियों में भी छुट्टी तो मिलती है, तो फिर मातृत्व के कामों से छुट्टी क्यों न मिले! तनावमुक्त समय व्यतीत करने के बाद, आप तरोताजा होकर लौटती हैं।

इसके लिए आपको घर से बाहर जाने की भी जरुरत नहीं हैं। आप अपनी किसी करीबी दोस्त से फोन पर बात कर सकती हैं या फिर सब चीजों से बचकर आधे घंटे का समय निकालें और कोई किताब पढ़ें।

पति के साथ भी कुछ वक्त गुजारें

नए माता-पिता बनने पर, आपको एक-दूसरे के साथ बिताने का ज्यादा समय नहीं मिलेगा। आपकी दिनचर्या अक्सर शिशु की जरुरतों और इच्छाओं पर निर्भर करेगी।

मगर, यह जरुरी है कि आप एक-दूजे के साथ अच्छा समय व्यतीत करें। जब शिशु सो रहा हो, तब आप कुछ समय निकाल सकते हैं। शिशु के थोड़ा बड़े होने पर आप परिवार के अन्य सदस्य या रिश्तेदार को शिशु की देखभाल सौंपकर अपने पति के साथ बाहर खाना खाने या फिल्म देखने जा सकती हैं।

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