क्या हम पेरेंट्स की उतनी केयर करते हैं जितनी की वो हमारी करते हैं 

आज के समय हर कोई व्यस्त रहता है। फिर भी हम अपने बच्चे की केयर कैसे भी मैनेज करके करते हैं। अब आता है सवाल अपने पेरेंट्स की,कि  हम उनकी  कितनी केयर करते हैं। बच्चों के देख- भाल के लिए आप समय निकाल लेते हैं। लेकिन जब माता -पिता की बात आती है तो ऐसा बिलकुल नहीं हो पाता है।कुछ लोग बूढ़े माँ -बाप को ओल्ड ऐज होम में छोड़ देते हैं। ताकि उनके लाइफ में कोई परेशानी न हो उनके बुजुर्ग माँ -बाप से। जब कभी भी ओल्ड ऐज में रह रहे लोगों से बात करते  है तो वो हमेशा खुश ही होकर आपको सारे जबाब देते हैं। अपने दर्द को किसी को ज़ाहिर नहीं होने देते हैं। उनको क्या दिक्कत है ,उनको क्या ख्वाहिश इसकी परवाह किसी को नहीं होती है। फिर ये बुजुर्ग अपने बच्चों के बातों का बुरा नहीं मानते कि क्यों उनको ओल्ड ऐज हॉउस में छोड़ दिया गया  है। आइये कुछ ऐसे सुझाव को पढे जिससे हम भी अपने पेरेंट्स की उतनी केयर करें जितनी अपने बच्चों की करते हैं –

  • पति -पत्नी अगर घर से दूर रहते है उनके साथ आपके इनलॉस नहीं रहते हैं, तो उनको यह अहसास न होने दें,कि वो अकेले लाइफ जी रहे हैं।लोगों  को चाहिए वो अपने पेरेंट्स  से समय -समय पर बात करें। यदि पेरेंट्स बच्चों को कॉल करें तो उनकी कॉल पर गुस्सा न कर,उनसे बात करने की कोशिशि करनी चाहिए। ताकि आपके पेरेंट्स को कभी तकलीफ नहीं होगी और हमेशा खुश भी रहेंगे।
  • बूढ़े माँ -बाप के लिए सरप्राइज़ शॉपिंग करके उनको अगर आप गिफ्ट करेंगे तो आपके पेरेंट्स काफी अच्छा फील होगा।
  • माता – पिता जब बूढ़े हो जाते हैं तो छोटे बच्चों की तरह उनका व्यवहार हो जाता है। जिसके लिए हम लोगों को अपने पेरेंट्स के हर दर्द को उनसे बाँट लेना चाहिए। जैसा कि पेरेंट्स आपके बचपन में आपके हर दर्द को खुद से सीने से लगा लेते थे और आपके हर खरोंच पर अपनी सारी मेहनत लुटा दिया करते थे।
  • पेरेंट्स को कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। क्योंकि अगर आप अपने के साथ व्यवहार करेंगे वही ,सारी आदतें आपके बच्चे से सीखेंगे और आने वाले समय आपको वही सजा मिलेगी जो अपने पेरेंट्स के करते आ रहे हैं।
  • पेरेंट्स को साल में एक बार या दो बार ,जब आपको समय मिले उनको बाहर टूर पर जरूर ले जाइये।आपके पेरेंट्स अपने विश को आपसे अगर नहीं शेयर करते हैं। तो ऐसे में आप खुद उनके विश  जानने की कोशिश कर और उनको पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं।
  • पति -पत्नी अगर वर्किंग हैं तो उनको अपने फैमली के लिए समय जरूर निकालें और बात करें।पेरेंट्स से आप लोगों का टच में रहने से उनके सारे दुःख अपने आप दूर हो जाते हैं।

“हम लोगों को भी अपने माता -पिता की उतनी ही केयर करनी चाहिए कि जितनी वो अपने बच्चे की करते हैं। आज के समय में लोगों की सोच बदल गयी है बड़े हो जाने पर माँ -बाप को अक्सर भूल जाते हैं। जो सही नहीं है। अगर आज के समय में हर इंसान इतना सोच लें कि अगर हम अपने माँ -बाप की सेवा नहीं कर रहे हैं तो क्या जब वो बूढ़े होंगे उनके बच्चे उनकी उतनी सेवा करेंगे। इंसान अगर सकारत्मक सोच के साथ कोई काम करें उसे कभी भी दुःख का सामना नहीं करना पड़ेगा। ”

 

 

loader