क्या बिना दर्द के टीकाकरण प्रभावी है, जानें डॉक्टर की राय !

देखा जाए तो एक नए पेरेंट्स की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि वह हर एक की सलाह को बहुत गौर से सुनती हैं। इतना ही नहीं कुछ लोग तो इंटरनेट का भी सहारा लेते हैं, क्योंकि कुछ वेब सर्विस ऐसी होती हैं जो आपको बेबी के बारे में कुछ अपडेट देते हैं, भले ही उनका बच्चा इस दुनिया में नहीं आया हो। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जब आप गर्भवती होती हैं तब गूगल आपके बॉडी के हर वो एक मूवमेंट के बारे में बताता है। फिर चाहे आपके रंग में परिवर्तन हो या फिर साँस लेने में कठिनाई हो। आपके पास एक ऐसा दोस्त होता है जो आपको हमेशा अच्छा और बुरा बताने के लिए तैयार रहता है। हालाँकि, आप किस-किस की बातें सुनेंगी क्योंकि कोई दोस्त या परिवार वाले आपको घरेलू उपचार की सलाह देंगे तो कोई आपको डॉक्टर और साइंस की बात मानने की सलाह देंगे। ऐसे में, एक नई माँ होने के नाते यह बिल्कुल आसान नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह से प्रश्न और भ्रम से भरा हुआ है। लेकिन, इन सब से आप बिल्कुल भी परेशान न हों क्योंकि, आज हम आपको मैं अपनी कहानी बताने जा रही हूँ-

यह एक विशेष दिन था, जब हम अपने बच्चे का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। क्योंकि, हमलोग पूरे आठ साल से एक बच्चे की चाहत में थे। ऐसे में, जब मैं गर्भवती हुई तो हमारी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। लेकिन जब वह वास्तव में पैदा हुई थी, तो हमारी खुशी दोगुनी हो गई थी। क्योंकि, हमलोग को यकींन नहीं हो रहा था कि वास्तव में ऐसा हुआ है।

तो क्या होगा अगर हमें किसी अपॉइंटमेंट के लिए घंटों तक इंतज़ार करना पड़ा? अगर हमें इसे एक महीने पहले ही लेना था? क्योंकि, हमलोग सबसे बेस्ट चाहते थे। हमारे माता-पिता का सोचना था कि हमलोग अपने बच्चे के लिए कुछ ज्यादा ही कर रहे थे, लेकिन जब उन्होंने देखा कि हम अपने पहले बच्चे के लिए कितना ज्यादा और लंबा इंतज़ार किये हैं तब वह चुप थे।

मैं आपको यह कहानी इसलिए बताना चाहती हूं क्योंकि, लगभग कोई भी इंडियन पेरेंट्स बिना दादा-दादी के हस्तक्षेप के पूर्ण नहीं है। हर लोगों का सुझाव आपको सिर्फ भ्रमित करता है और कुछ नहीं।   

इन सब के बीच एक मामला ऐसा भी था जब जन्म के बाद ही हमारी बेटी को टीका लगाया गया था।

जो न केवल घर के बल्कि दोस्तों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के प्रति मेरा सबसे पहला विरोध था। हालाँकि, इन चीज़ों से आप पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं और न ही अनजान बन सकते हैं। इस दौरान मैं अपने पति और पेरेंट्स के भी खिलाफ थी। ऐसे में, हमने अपने बच्चे के लिए डीपीटी टीकाकरण को चुना जो कि कम असुविधाजनक था और साथ ही इसमें कम दर्द और बुखार की संभावना थी। हमारे डॉक्टर ने हमें यह सलाह दी कि यह सामान्य रूप से प्रभावी है, और इसका साइड इफेक्ट भी कम है। हालाँकि, यह अनुभव मेरे लिए सबसे बेस्ट था जिसे मैंने अन्य माँ के साथ साझा किया। देखा जाये तो हम अपना मन कैसे बना सकते थे? क्योंकि, रीसर्च का कोई भी हिस्सा आपको उन लोगों के अनुभवों को नापसंद करने देती है जिन पर आप भरोसा करते हैं।

मेरी मां ने पहली बार पूछा- जहाँ हमें डॉक्टर ने टीके के बारे में बताया- "इसकी कीमत कितनी होती है?" हमने कहा हम नहीं जानते लेकिन हम जांच करेंगे। लेकिन, जैसे ही उन्हें इसके बारे में पता चला उन्होंने तुरंत कहा कि किसी टीकाकरण पर इतना खर्च करने की क्या ज़रूरत थी। मैंने धीरे से उसका जवाब दिया कि, "आपके शरीर को टीकाकरण के प्रभावी होने के लिए दर्द के माध्यम से जाना पड़ता है। यदि आपका बच्चा बीमार नहीं पड़ता है, तो यह टीका किसी भी काम का नहीं होता।"

हालाँकि, मुझे एहसास नहीं हुआ कि हम अपने बच्चे की पसंद के लिए इतनी दृढ़ता से महसूस करते हैं, भले ही वह टीकाकरण क्यों न हो। इतना ही नहीं मैं इसके लिए भी तैयार थी कि जब मेरे पापा मुझ से कुछ कहेंगे तब में उन्हें इसके बारे में बताउंगी और गूगल पर भी दिखाउंगी कि इसके यूज़ कितने जगह हैं। ऐसे में, डिनर के समय मेरी मां मेरे से बात करते हुए धीरे-धीरे कह रही है कि मुझे अपनी बेटी के बारे में अधिक ध्यान देना चाहिए और उसके लिए क्या सही है वही करना चाहिए। ऐसे में, जब में डॉक्टर से मिलने गई तब मैं अपने पेरेंट्स को साथ लेकर गयी। यह असामान्य था, लेकिन मुझे उनसे बात करना पड़ता था। क्योंकि, मुझे नहीं पता था कि इसे और कैसे समझाया जाए। लेकिन, जब डॉक्टर ने मेरी बेटी को देख लिया तब मैंने इस मुद्दे को उठाया और डॉक्टर से कहा कि एक नई माँ के लिए यह काफी तनाव भरा था।

इस बात पर डॉक्टर का कहना था कि यह सबसे महत्वपूर्ण है कि आपके घर का माहौल इस समय तनाव मुक्त रहना बहुत जरूरी। क्योंकि, यह माँ और बच्चे दोनों के लिए जरूरी है। साथ ही उन्होंने हमें आश्वस्त भी किया कि यह टीका पूरी तरह से प्रभावी है। इतने में मेरे पिता ने पूछा, "आप कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपका अस्पताल पैसे बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है?" एक समय के लिए मुझे ऐसा लगा कि कास मैं धरती के अंदर चली गई होती। उन्होंने कहा कि हम अपने पूरे जीवन में सिर्फ इतना सुना है कि यह दवा तभी प्रभावी होता है जब शिशु को दर्द और बुखार होता है। उदाहरण के लिए,उन्होंने कहा कि  "आयुर्वेदिक दवाओं को देखो," "वे स्वाद में भले ही भयानक लगते हों लेकिन वे काम करते हैं। बिना कष्ट किये फल नहीं मिलता।" लेकिन, मेरे डॉक्टर ने बहुत सरल तरीके से उन्हें समझा दिया। मुझे आश्चर्य है कि मैंने खुद इसके बारे में क्यों नहीं सोचा।

"सर," उन्होंने मेरे पिता को संबोधित करते हुए कहा, "इन दिनों काम करने के लिए आपको दर्दनाक तरीके अपनाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, ऐसा जरूरी नहीं है कि आप टिके  को प्रभावी बनाने के लिए बच्चे को दर्द और बुखार में रखने की जरूरत है। साइंस ने चीज़ों को बहुत आसान बना दिया है। वह मेरे पिता को समझाने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि, घर वापस जाते समय रास्ते में, मेरी मां ने मेरे साथ शुरू किया, "लेकिन ..." मेरे पिता ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जो कि मुझे साफ समझ में आ रहा था।  उसी दिन रात के खाने की मेज पर, मेरी माँ ने कहा, "अब आप बड़े हो गए हैं। आप जानते हैं कि आपकी बेटी के लिए सबसे अच्छा क्या है, "और वह मेरे लिए खाना निकालने लगी।

(This is first-person account of Chhaya Menon’s experience in her own words. Please write to her at chhayamenon88@gmail.com)

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