खुद लें बच्चे को ब्रेस्टफीड या फाॅर्मूला फीडिंग का फैसला 

बच्चे को मां दूध कितना जरूरी है ये आज भी विवाद का मुददा बन जाता है। जब भी बच्चे को स्तनपान कराने की बात होती है। हर कोई इसपर बहस करने के लिए हाजिर हो जाता है। बच्चे के शुरुआती दौर में स्तनपान कितना जरूरी है। क्यों पिलाना चाहिए वगैरह वगैरह…..

 

 

 

इंटरनेट, सोसाइटी और रिश्तेदार हर कोई इस बात पर फोकस करता है कि बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराना चाहिए। सवाल ये है कि क्या लोगों के मुताबिक मुझे स्तनपान कराना है या इसमें मेरी भी मर्जी का होना जरूरी है। मां को क्या करना बच्चे के साथ कैसे वो आराम से रहती है। उसकी सुविधा का ध्यान रखना भी तो जरूरी है। कई बार ऐसी दिक्कतें आती हैं कि मांओं के पास इतनी जगह या यूं कहें ऐसी जगह नहीं मिलती जहां वो दूध पिला सकें। ऐसे वो अगर फाॅर्मूला फीडिंग कराती है तो दिक्कत क्या है? फाॅर्मूला फींिडंग कराने के कई सारे फैक्टर भी हैं। इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि आप क्या चाहती हैं। ये भी आसामान्य नहीं है कि औरतें ये कहती मिल जाएंगी कि मैं फीड कराने के लिए जाॅब नहीं कर रही हूं। इसके अलावा आॅफिस में मैं पंप नही कर सकती इसलिए फाॅर्मूला फीडिंग कराना शुरू किया। यहां पर मुददा ये नहीं होना चाहिए कि बच्चे को आप क्या पिला रही हैं। मुददा ये होना चाहिए की उसकी सेहत पीड्रिटीशयन के मुताबिक हो। इसके अलावा ये ध्यान रखना जरूरी है कि क्या बच्चा उसमें सुरक्षित है। इंटरनेट पर इसपर खास लेख मौजूद है जिनको पढ़ा जा सकता है और जाना जा सकता है कि ब्रेस्टफीड कराने और न कराने के पीछे कारण क्या हो सकता है। बच्चे के साथ अपनी च्वाइस और सुविधा का भी ध्यान रखें। सेहत का ध्यान तो हर मां हर हाल रखती है।

 

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