जरूरी नहीं कि सिर्फ ख्वाहिशें अपनी ही हों –

बच्चे हमसे बहुत कुछ सीखते हैं मगर कई बार वो हमें बहुत कुछ सीखा भी देतें हैं। हमें तो पढ़ाया और सिखाया जाता है कि लोगों की मदद करें मगर असल में हम कितना कर पाते हैं। असल में हमारी खुद की ख्वाहिशें इतनी बड़ी हो चुकी हैं कि दूसरी कि तरह तब अब दिखता ही नहीं। ऐसे में जब एक छोटा सा बच्चा किसी की मदद के लिए खुद की ख्वाहिशें कुर्बान कर दे तो क्या कहेंगे? इस कहेंगे असल मायने में सीख और मानवता जो ये बच्चा हमें सीखा रहा है।

 

 

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