जब पसंद न हो बच्चे के दोस्त

कहते हैं कि जैसे लोगों के साथ हम रहते हैं। हमारी सोच भी वैसी ही हो जाती है। महान कवि रहीम और कबीर ने गए हैं कि जैसी ̔संगत बैठिए वैसी बु़िद्ध होए̕। हम अपने बचपन पर गौर करें तो याद आएगा। हमारे अभिभावक हमारे लिए कितना परेशान रहते थे। खासकर के हमारे दोस्तों को लेकर। उनको ऐसा लगता था कि अगर हमारी दोस्ती समझदार और पढ़ाकू से होगी , तो हम भी अव्वल आएंगे। हमारा भविष्य उज्जवल होगा। आज वो समस्या हमारी भी हो चुकी है। अब जब अपने बच्चे हैं तो हमको भी कई बार उनके दोस्त अच्छे नहीं लगते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या वाकई जिसे हम नहीं पसंद करते हैं। वो बच्चा बुरा है या हमने ही गलतफ़हमी पाल रखी है। हम यहां बात कर रहे हैं कि अगर बच्चे का दोस्त हमको नहीं पसंद है तो हम क्या करें। बच्चो का मन इतना कोमल होता है कि उनको मना करने पर वो उसे अन्यथा ले सकते हैं। इससे बेहतर ये है कि इसका कोई आसान हल निकाला जाए। जिससे बच्चे को भी समस्या न हो और आप भी सुकून से रह सकें।

ईमानदारी दिखाएं- एक बार गौर करें कि आपको उसका दोस्त आखिर क्यों नही पसंद है। कई बार जिन बच्चों की आवाज़ तेज़ होती है या जो विनम्र नहीं होते हैं। हम उसे नापसंद कर देते हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि बच्चा किसी से भी दोस्ती कर सकता है। फिर चाहे वो आपको पसंद हो या न हो। इसलिए उसे दोस्त से दूर रखने के लिए पूरी जानकारी जरूर जुटा लें। इसके बाद उसे बताएं कि उसकी किस से आदत से बच्चे का दोस्त आपको नहीं पसंद है।

एकदम से मना कतई न करें- बच्चों को कोई बात अगर सख़्ती से मना की जाती है। तब वो उसे जरूर करते हैं। इस बात का पूरा ख़्याल रखें कि उसे मजबूर कतई न करें। इसके बजाय उसके साथ बैठें और उसे समझाएं कि दोस्त की किन बुरी आदतों का उसपर गलत असर पडे़गा। उसकी बुरी आदतें कैसे उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके साथ ये भी पता करें कि आपका बच्चा अपने दोस्त की किन चीजों से आकर्षित होता है। वाकई में उसका दोस्त बुरा है तो उसे कहीं और व्यस्त करें। कुछ ऐसी तरक़ीब निकालें जो उसे पसंद आए, जहां वो व्यस्त रह सकता है। फिर चाहे वो कोई टीवी चैनल हो या फिर मजे़दार गेम। नए दोस्त बनाने के लिए प्रेरित करें।

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कुछ शर्तें रखें- दोस्त से अगर बच्चा दूरी नहीं बना पर रहा है। तो ये तरीका आपकी मुश्किल कम कर सकता है। ये आसान शर्त रखें कि वो अपने दोस्त साथ घर पर खेले। इससे दोनों आपकी देखरेख में रहेंगे। इससे वो अनुशासित होगा और आप स्थिति पर काबू पा सकेंगे।

गलतफ़हमी से बाहर निकलें- हो सकता है कि उसके दोस्त के लिए जो धारणा आपने बना ली है। वो सिर्फ आपका शक या डर हो। इसको जितनी जल्दी हो सके दूर करें। इसलिए उस बच्चे को अच्छे से समझने के लिए उसे घर बुलाएं। उससे बातें करें उसके साथ थोड़ा वक्त बिताएं। इससे आप निर्णय ले पाएंगे कि सही और गलत क्या है। उसके आधार पर ही आप अपने बच्चे को आसानी से समझा पाएंगे। सबसे ज्यादा यहां पर ये है कि प्यार और दुलार से ही बच्चे को समझाया जा सकता है। उसे बुरी चीजों और संगत से दूर रखने के लिए ये तो करना ही पडे़गा।

 बच्चों के दोस्तों को अगर पसंद नहीं करते तो उनको ये बात प्यार से बताएं। इसके लिए आपके पास खास वजह का होना जरूरी है। ताकि बच्चा आपकी बात समझे और उस पर अमल करे।

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