जब बुज़ुर्गों का हो साथ बचपन हो खास 

 

बच्चे की परिवरिश हर माँ -बाप अच्छे तरीके से करते है लेकिन कही न कहीं उन रिश्तों  की कमी रह जाती जिनपर  हम ध्यान नहीं देते है।  भारतीय समाज में हम हर रिश्ते की अहमियत को समझते हैं । ज़्यादातर लोग अब जॉइंट फैमिली में नहीं रहते है, कहीं न कहीं हम उन रिश्तो को भूलते हुए आगे निकल आये हैं।  हर रिश्ते का अपना महत्व है खास करके परिवार में बुज़ुर्गों का,  आइये जानते हैं  कुछ टिप्स जिनसे हम अपने किड्स को दे सकेगें संस्कार और  एक बेहतर जिंदगी –

 

1 – ज्ञान वर्धक बातें हो खास :- माता – पिता अपने बच्चे को अच्छी बातें ही सिखाते है, लेकिन जब बड़े बुर्जुग आपके बच्चो से इंटरैक्ट करते है, तो वो उनको बहुत सारी ज्ञान की बातें सिखाते है।  जो उनके  उज्जवल  भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होता है।  क्योंकि  हमारे बड़े- बूढे  जिंदगी में आने वाली कठिनाइयों से लड़ने की ताकत भी देते हैं।   खासकर  बुज़ुर्गों से बच्चे हर रिश्ते का महत्व और उनको निभाने के लिए कैसे क्या करे जैसी बातें भी सीखतें है| उनसे वो ढेरों संस्कार सीखते हैं।

 

2 – कॉलोनी में हो कोई अपना सा  :-  शहरी घरों  में  तो पति- पत्नी ही रहते है ऐसे भी लोग है।  जिनके साथ आपका मेल-जोल भी होता है, अगर आपके घर में बड़े-बूढ़े नही हैं,  तो आपके कॉलोनी के बड़े-बुजुर्ग के पास अपने बच्चों  को भेज दे, ताकि बच्चे उनके साथ कुछ समय रह कर अच्छी ज्ञान की बाते सीख लेंगे।  इसके लिए  पेरेंट्स का उन पर विश्वास होना सबसे पहले जरूरी है | बच्चों को भेजने के पहले ये जान लें की क्या वो बुज़ुर्ग विश्वास योग्य हैं।

 

3 – मानसिक शक्ति बढ़ाना :- बच्चों  के दिमाग में कुछ ना  कुछ खुराफात होता है लेकिन जब हम उनकी हर आदतों पर ध्यान देते हैं, कि वो कुछ खास करे।  पेरेंट्स या बड़े बुजुर्ग उनकी गतिविधियों को सही दिशा में मार्गदर्शन दें, तो उनकी खुराफतों से उन्हें नुकसान नहीं होगा।  इसके अलावा  वो कुछ नया सीखते रहेंगे ।

 

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4 – अपनत्व की भावना :- कामकाजी माँ-बाप अपने नन्हे-मुन्नों की परवरिश के लिए अक्सर प्ले स्कूल्स, क्रेच, नैनिज़ पर निर्भर रहते है। देख-रेख के आभाव की वजह से बच्चों  के मामले में लापरवाही बरत सकतें है।  इसलिए अपनेपन के लिए बड़े-बुज़ुर्गो का साथ इन ऑप्शंस से बेहतर है।

 

5 – विरासत संजोना :- दादा-दादी की सीख से पुरानी पीढ़ियों की अनेको बातें, सीख और नुस्खे पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती है। इस लिगेसी को बनाये रखने के लिए बुज़ुर्गो का नियमित सानिध्य ज़रूरी है, नहीं तो बहुत सी बातें एक पीढ़ी के जाने के बाद विलुप्त हो जाएंगी।

 

6 – एकांकी जीवन से मुक्ति :- घर में चहल-पहल और पारिवारिक स्वास्थ्य के लिए बड़ों का साथ आवश्यक है। अन्यथा एकल परिवार में सभी सदस्य अकेले पड़ जाते है और अपनी परेशानियां, बातें आदि खुद में समेट कर रखते है।  यह आगे चल कर डिप्र्रेशन जैसे मानसिक  बीमारी का कारण भी हो सकता है।

 

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