इस तरीके से मनाएं छोटी दिवाली को खास

छोटी दिवाली बड़ी दिवाली से एक दिन पहले आसिन मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को मनाई जाती है। हालांकि, इस दिन भी दिए और पटाखे जलाए जाते हैं। इतना ही नहीं इस दिन भी शाम के समय माँ लक्ष्मी और गणेश की पूजा-अर्चना की जाती हैं, और तरह-तरह के पकवान और मिठाईयाँ बनाई जाती हैं।

आपको बता दें कि हर जगह के लोगों को इस छोटी दिवाली को मानाने का भी  अलग-अलग रीति-रिवाज होता है, कुछ राज्यों में इस दिन फूलों की रंगोली बनाई जाती है, क्योंकि उनका मानना होता है कि इस दिन माँ लक्ष्मी उनके घर को आती हैं।

आमतौर पर, छोटी दिवाली को बलि प्रतिपदा के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि, इस दिन भगवान विष्णु ने केवल दो पगों से तीनों लोकों को नाप दिया था। इसलिए इस दिन को लोग छोटी दिवाली के रूप में मनाते हैं।

इसके अलावा, कुछ राज्यों में इस दिन लोग सुबह-सुबह उठ कर दरिद्र को अपने घर से बाहर निकालते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि उनके घर में दरिद्र का वास न हो, बल्कि हमेशा लक्ष्मी माँ विराजमान रहें।

वहीं रात के समय एक दीपक घर के बाहर जलाया जाता है, जिसे जम का दिया कहते हैं। इसके पीछे यह मान्यता है कि घरों में सिर्फ ख़ुशी के दीपक जलने चाहिए, बाकि गम के दिए को हमेशा के लिए बाहर निकाल देना चाहिए।

ऐसे में, धनतेरस के बाद और दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली यह दिवाली भी बहुत रोचक होती है, जो लोगों के लिए बहुत मायने रखता है।     

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