इस तरह के लक्षण मौजूद होने पर भूलकर भी बच्चों में न करें घरेलू उपचार

इसमें कोई शक नहीं है कि बड़े लोगों से ज्यादा छोटे बच्चों की देखभाल की जरूरत पड़ती है। खासकर जो लोग पहली बार पेरेंट्स बने हों उन्हें विशेष ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। क्योंकि, उन्हें शिशु के हेल्थ और उससे संबंधित परेशानियों के बारे में ज्यादा पता नहीं होती है। इतना ही नहीं, जब बच्चे बीमार पड़ते हैं तब वह घरेलू उपचार का सहारा लेते हैं। लेकिन, कुछ स्थिति या इस तरह के लक्षण मौजूद होने पर भूलकर भी बच्चों घरेलू उपचार नहीं करना चाहिए, जो निचे दिए जा रहे हैं-

बहुत तेज़ बुखार होने पर

जब आपके नवजात शिशु को लगातार 100 डिग्री फेरनहाइट या उससे अधिक बुखार हो रहा हो। इसके अलावा यदि आपके बच्चे की उम्र तीन महीने से अधिक हो और वह 102 डिग्री फेरनहाइट या उससे अधिक बुखार से तप रहा हो, साथ ही शरीर पर लाल दाने निकल रहे हों, तो ऐसे में समय रहते डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि शिशु की देखभाल की जा सके।

शिशु का दूध न पीना

कई बार शिशु कुछ कारणों से दूध नहीं पीते हैं ऐसे में आप खुद से यह तय कर लेते हैं कि उसका पेट भरा है या गैस की परेशानी है जिसके कारण वह स्तनपान नहीं कर रहा है। लेकिन, यदि आपका शिशु पिछले आठ घंटे से दूध का एक बूंद न लिया हो, इसके अलावा यदि वह पिछले 24 घंटे के अंतराल में अपने सामान्य राशि की तुलना में आधा से भी कम दूध पिया हो, तो ऐसे में डॉक्टर से संपर्क करें।  

आँखों में संक्रमण होने पर

अक्सर आपने देखा होगा कि जब शिशु में इस तरह की समस्या उत्पन्न होती है तब घरवाले घरेलू उपचार करने की सलाह देते हैं जो कि गलत है। ऐसे में, यदि आपके नवजात शिशु की आंखें, गुलाबी, चिपचिपी हो गई हों या उससे पानी निकल रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि, यह आँखों में संक्रमण का एक लक्षण जिसे, मेडिकल भाषा में कजंक्टिवाइटिस भी कहते हैं। यदि आपने इसका उपचार सही समय पर न करवाया और घरेलू उपचार कर रही हों तब यह आँख के लिए खतरा पैदा कर सकता है। क्योंकि, आँख शरीर का बेहद नाजुक अंग होता है।

पेट में दर्द होने पर

शिशु में पेट दर्द की समस्या बेहद आम है, जिसे लोग घरेलू तरीके से ठीक करने की कोशिश करते हैं। लेकिन, जब शिशु लगातार रो रहा हो, इसके साथ ही उसे कई बार उल्टियां हो रही हो और पेट में गैस बन रहा हो तब जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से संपर्क करें ताकि सही समय पर इलाज किया जा सके।

उल्टी होने पर

जब आपका शिशु बार-बार या 12 घंटों या इससे ज्यादा से उल्टी कर रहा है। या फिर उसे उल्टी के साथ-साथ दस्त, बुखार या चकत्ते होने जैसे अन्य लक्षण भी हैं, तब तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

साँस लेने में परेशानी

जब आपके शिशु को सांस लेने में तकलीफ हो रही हो या असामान्य रूप से जल्दी-जल्दी सांस ले रहा हो, विशेषकर यदि उसकी त्वचा और होंठ की रंगत हल्की नीली हो रही हो। इसका मतलब है कि उसे पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। तो समय रहते डॉक्टर से संपर्क करें ताकि शिशु के जान को बचाया जा सके।

ऐसे में, न केवल बच्चे में बल्कि बड़े लोगों में भी घरेलू उपचार एक हद तक मददगार साबित हो सकते हैं, तो इसलिए आपको पूरी तरह से इसपर भरोसा नहीं करना चाहिए और वो भी तब जब बात आपके बच्चे की आती है।

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