इन तरीकों से आपके बच्चे का दिमाग रहेगा दो कदम आगे

मुझे आज भी याद है कि एक बार मेरी बेटी स्नान के बाद बाथटब के पानी को बहुत ध्यान से देख रही थी। उसने यह नोटिस किया कि बाथटब से पानी धीरे-धीरे बाहर की ओर निकल गया और उसने कहा “अम्मा पानी का बॉलरीना देखो” यानि कि यह कैसे गोल-गोल घूम रहा है। मैं बहुत खुश थी कि उसने पानी निकलने के तरीके को कितने अच्छे और सरल शब्दों में समझाया। यह सच था कि वह पानी एक बॉलरीना की तरह लग रहा था जो उसके पैर की उंगलियों पर दबाव डाल रहा था। इस समय मेरी बेटी मुश्किल से तीन साल की होगी। एक बात और  है जो मुझे याद है कि मेरे बेटे को 100 तक गिनने के लिए कहा गया था। ऐसे में मैंने देखा कि अधिकांश बच्चों की तरह 100 तक गिनने के बजाए, वह हर 10 को अपने उँगलियों पर गिनने लगा ताकि उसकी गिनती इधर-उधर न हो जाए और साथ ही वह बोर न हो। इस तरीके से उसके गिनती को देख मैं काफी आश्चर्यचकित थी, इसलिए मैंने उससे पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया।

 

उसने कहा कि, "मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि जब आप स्किटल के बैग को हम तीनों के बीच बांटती हैं तो आप भी ऐसा करती हैं।" हमारे जीवन में कई बार ऐसे क्षण आते हैं जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि छोटे बच्चे के दिमाग में क्या चल रहा है। क्योंकि, बच्चों के पास कम दिमाग नहीं होते हैं। उनका दिमाग आकाश की तरह खुला और बड़ा होता है, और वह जो कहते हैं वह सत्य होता है साथ ही वह हर पल कुछ नया सीखने की कोशिश करते हैं।

 

क्या आप जानती हैं कि 90 प्रतिशत मस्तिष्क का विकास तब होता है जब एक बच्चा छह साल का होता है?

 

अधिकांश दिमाग का विकास 0 से 3 साल की उम्र के बीच होता है, विशेष रूप से तब जब मस्तिष्क स्वयं को बनाने के लिए अपना अधिकांश काम कर रहा होता है। आपको बता दें कि जब मेरी बेटी छह वर्ष की थी उस दिन से, उसका दिमाग सिर्फ काम नहीं कर रहा था  बल्कि तेज़ी से विकास भी कर रहा था; जैसे कि चीजों को बनाए रखना, चीज़ों को याद रखना, चीज़ों को पंजीकृत करना, चीज़ों को समझना या फिर चीज़ों को पहचानने के रूप में।

 

पहले उदाहरण में, आप बहुत स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि कैसे मेरी बेटी विकास के हर पहलुओं को सीख रही है। खासकर वह रोजमर्रा की जिंदगी में जो कुछ देखती है उसका वह अपने निजी जिंदगी में वर्णन करती है ; बॉलरीना का मूवमेंट पानी के भंवर के बराबर है। इतना ही नहीं वह अपने भाषा कौशल और मानव मस्तिष्क की प्रवृत्ति का उपयोग भी कर रही है ताकि हम अपने आस-पास के हर जगह के पैटर्न को ढूंढ सकें। उसने अपने मस्तिष्क में इस बात को डाल ली है कि पानी में यह भंवर कैसे होता है। वहीं दूसरी ओर मेरा बेटा यह देख कर गिनती करता है कि मैं कैसे करती हूँ।  

ऐसे में, एक पेरेंट्स होने के नाते हमारा फर्ज बनता है कि हम अपने बच्चे को हमेशा सही और उचित जानकारी दें ताकि वह आगे बढ़ सके। जिसमें उचित पोषण, स्वस्थ आहार से लेकर प्यार तक शामिल है। इसलिए, हमने अपने बच्चों के बढ़ते विकास के लिए जूनियर हॉर्लिक्स को अपनाया। इसके प्रयोग से मैंने पाया कि इसमें डीएचए, कोलाइन और अन्य पोषक तत्व मौजूद हैं जो बच्चों के मस्तिष्क के विकास में मदद करते हैं और साथ ही उनकी लंबाई और वजन बढ़ाने में भी मदद करते हैं।


हर माता-पिता को अपने बच्चों के बारे में बात करना अच्छा लगता है। साथ ही इस बात को भी समझने में मदद मिलती है कि बच्चे का दिमाग किस गति से विकसित कर रहा है। यदि जन्म के बाद मस्तिष्क का विकास तेजी से हो रहा है खासकर छह साल की उम्र तक तब उसका शरीर अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा का उपयोग करता है। ऐसे में अपने बच्चे के आहार में जरूरी पोषक तत्वों को जरूर शामिल करें। देखा जाए तो टोडलर की तुलना में एक वयस्क के पास बहुत अधिक ज़िम्मेदारी होती है और उनका दिमाग भी ज्यादा चलता है। जबकि एक बच्चे का दिमाग अधिक सक्रिय और ऊर्जा उपभोग करने वाला होता है । ऐसा इसलिए होता है क्योंकि, एक वयस्क की तुलना में बच्चे बहुत सारी जानकारी लेते हैं क्योंकि उनके लिए दुनिया बड़ा और आश्चर्य से भरा हुआ होता है।

 

इस वीडियो को देखें जो कि एक बच्चे के सक्रिय दिमाग के बारे में बात करता है!



(जूनियर होर्लिक्स के सहयोग से)

 

डिस्क्लेमर: जूनियर हॉर्लिक्स एक पौष्टिक खाद्य पाउडर है जो आपके बच्चों में दैनिक आहार के रूप में उनके पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करता है। ध्यान रहे कि आप दो साल से कम उम्र के बच्चों को उनके आहार में शामिल न करें।

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