इन 5 कारणों की वजह से डॉक्टर करते हैं सीजेरियन डिलिवरी

प्रेगनेंसी के दौरान हर महिलाएं चाहती हैं कि उनका नार्मल डिलीवरी हो, लेकिन कुछ परिस्थितियों में सीजेरियन डिलिवरी की जाती हैं। हालाँकि, सीजेरियन सेक्शन एक ऐसी डिलवरी होती है, जिसमें महिला के पेट के निचले हिस्से, और गर्भाशय पर कट लगा कर शिशु को बाहर निकाला जाता है। इस प्रकार की प्रक्रिया को डॉक्टर, C-सेक्शन कहते हैं।

सामान्यतः इस तरह की डिलवरी तब की जाती है, जब सामान्य डिलवरी में महिला या बच्चे को ख़तरा होता है। इस दौरान माँ को एनेस्थेसिया देकर उसके पेट समेत पूरे निचले हिस्से को सुन्न कर दिया जाता है।

हालाँकि डॉक्टर अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं कि एक नॉर्मल डिलवरी की जाए, लेकिन कभी-कभी यह माँ और बच्चे दोनों के लिए घातक हो सकती है और इसीलिए डॉक्टर को सिजेरियन डिलवरी करना पड़ता है।

वह परिस्थितियां जिनमें सीजेरियन डिलिवरी की जरूरत पड़ सकती है:-

प्रसव पीड़ा

इस परिस्थिति में सीजेरियन डिलिवरी की जरूरत पड़ सकती है, यदि माँ को बहुत ज्यादा और रुक-रुक कर प्रसव पीड़ा हो रही हो या प्रसव पीड़ा होना बंद गई हो। तब ऐसे में, डॉक्टर सीजेरियन डिलिवरी करते हैं।  

  • बच्चे दानी का मुंह नहीं खुलना
  • कई बार दवाओं से बच्चे दानी का मुंह नहीं खुल पाता, जिससे कि सीजेरियन डिलिवरी की जरूरत पड़ती है।  
  • बच्चें की धड़कन
  • यदि बच्चें की दिल की धड़कन बहुत तेज या बहुत धीमी हो गयी हो, तब डॉक्टर सीजेरियन डिलिवरी की सलाह देते हैं।
  • शिशु का उल्टा होने पर
  • यदि बच्चें के गले में नाल या गर्भनाल लिपटी हो, या शिशु आड़ा या उल्टा हो गया हो। तो इस स्थिति में भी सीजेरियन डिलिवरी की जाती है।
  • पेट में गंदा पानी छोड़ने पर
  • यदि बच्चा, पेट में ही गंदा पानी (मल, मूत्र) छोड़ दे, जिसे मिकोनियम कहते हैं, इस स्थिति में तुरंत ऑपरेशन कर बच्चे की जान बचाई जाती है।

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