इन आसान तरीकों से करें टाइफाइड के लक्षण की पहचान और इसके उपचार

टाइफाइड बुखार एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो साल्मोनेला एंटिका सीरोटाइप टायफी बैक्टीरिया की वजह से होता है। जो, इंसान के आंतों में सूजन पैदा कर देता है, जो कि बुखार के कारण को पैदा करता है। यह बैक्टेरिया आपके शरीर में आपके मुंह के जरिए प्रवेश करता है, और कुछ दिनों तक यह आपके इंस्टेटाइन में रहता है। जो आपके आँतों की दिवार और ब्लडस्ट्रीम में पहुँच कर अपना असर दिखाना शुरू करता है। आमतौर पर यह सबसे पहले आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।  

टाइफाइड के क्या कारण हैं ?

टाइफाइड बुखार होने का सबसे बड़ा कारण वैसे दूषित भोजन या गंदा पानी पीने से है जिसमें बैक्टीरिया की मात्रा मौजूद हो। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति में बहुत दिनों से सर्दी, खाँसी या बुखार हो और उसे नज़रअंदाज़ किया जा रहा हो। तब ऐसे में, टाइफाइड का बैक्टेरिया आपके ऊपर हावी हो सकता है। साथ ही यदि किसी टाइफाइड से पीड़ित व्यक्ति के झूठे पानी पीने से भी इस तरह की समस्या उत्पन्न होती है। 

टाइफाइड के क्या लक्षण हैं ?

आमतौर पर, टाइफाइड के शुरूआती लक्षण नज़र नहीं आते हैं, लेकिन कुछ दिनों में रोगी अपने अंदर इस तरह के लक्षण देख सकते हैं,जो निम्न हैं-

– उल्टी और दस्त की समस्या

– तेज़ बुखार 104 डिग्री से अधिक 

– भूख की कमी 

– बहुत अधिक सुस्ती 

– तेज़ सर दर्द 

– भूख न लगना 

इन सब के अलावा, कुछ लोगों को पेट दर्द की समस्या भी इस दौरान रहती है। 

टाइफाइड के उपचार क्या हैं ?

टायफाइड बुखार का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जाता है जो साल्मोनेला बैक्टीरिया को मारता है। आपको बता दें कि इन दवाओं के प्रयोग से पहले मृत्यु दर 20% थी। जिसमें मौत का सबसे बड़ा कारण भारी संक्रमण, निमोनिया, आंत्र रक्तस्राव और आंतों में छेद पाया गया। लेकिन, एंटीबायोटिक दवाओं और उचित देखभाल के कारण मृत्यु दर में 1% -2% तक कमी पाई गई। आपको बता दें कि उचित एंटीबायोटिक थेरेपी के साथ, आमतौर पर एक से दो दिनों के भीतर रोगी की हालत में सुधार होता है। 

हालाँकि, टाइफाइड बुखार के उपचार के लिए कई एंटीबायोटिक प्रभावी हैं। जिसमें (Chloramphenicol) का प्रयोग बहुत किया जाता है। साथ ही इसके कोई गंभीर साइड-इफ़ेक्ट भी देखने को नहीं मिलते हैं। इसके अलावा, भी कई दवाएं और वैक्सीन उपलब्ध हैं जो गंभीर मामलों में रोगी को दी जाती है। 

टायफाइड के मरीजों को क्या खाना चाहिए?

इन दिनों मरीजों को अपने खान-पान का विशेष तौर पर ध्यान रखने की जरूरत है, जैसे-

– हल्का भोजन करें जो आसानी से पचने में सहायक हो। 

– मूंग दाल की खिचड़ी का सेवन करें। 

– पपीते का सेवन करें, क्योंकि यह आपके पेट के लिए अच्छा माना जाता है। 

– दूध में बने दलिया का सेवन करें। 

– अधिक मात्रा में पानी का सेवन करें। 

– तुलसी की पत्तियों का सेवन करें। 

न खाने वाले खाद्य-पदार्थ 

– बहुत अधिक मिर्च, तेल- मसालों से बचें। 

– बाहर के जूस का सेवन न करें। 

– जंक फ़ूड आदि का सेवन न करें।  

इन सब के अलावा, इससे बचने के कुछ आसान उपाय भी हैं जिसे जरूर फॉलो करें जैसे कि खाना खाने से पहले अपने हांथों को अच्छे से धुल लें, बाहर के पानी को पिने से बचें और साथ ही ठेले और खुले चीज़ों को भी हाँथ न लगाएं क्योंकि इससे आपकी परेशानी बढ़ सकती है। 

Feature Image Source: Momjunction

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