10 तरीके से बच्चों को मानसिक रूप से स्ट्रांग बनाये 

माता-पिता बच्चों को गेम्स खेलने और गिटार बजाने जैसी आदि आदतों को उनमें आसानी से शामिल करते हैं। बच्चों को मेंटली स्ट्रांग बनाने की कोशिश करनी चाहिए।बच्चा मानसिक रूप से मज़बूत है ,तो वो संसार के किसी भी मुसीबत का सामना करने में सक्ष्म होगा। मानिसक  मज़बूत बनाना कोई  काम नहीं  कठिन है,जैसे की बाइक चलाने की सीख देना आदि। बल्कि ये पूरी जिंदगी के लिए सीख होगा, कि आपका बच्चा अगर मानसिक रूप  स्ट्रांग है, तो ज़िंदगी की हर कठिनाइयों का सामना  खुद कर सकता है।

1 –गलती करने का अवसर दें :-बच्चों को गलती करने की आज़ादी भी मिलनी चाहिए। गलतियों से ही उनको सही काम करने की सीख मिलेगी। आज -कल बच्चों का  होम वर्क पेरेंट्स का होम वर्क बन गया है। पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चे को अपना  काम खुद से करने दें, ,जैसा कि आप अपने समय में  करते थे ।

 

2 –खुद से करें कठिनाई का सामना :-माता-पिता को  बच्चों  को खुद से कठिनाइयों का सामना करने की आदत डालनी चाहिए। इससे वो आत्मनिर्भर होंगे। सच में अगर वो छोटे है ,अगर वो चीजों को इधर -उधर फेंक देते हैं,और गंदगी फैलाते है। तो उनको ऐसी सीख देनी चाहिए कि खुद से गंदगी साफ कर  सकें। अगर वो किसी वस्तु को तोड़ देते हैं, तो उनको वापस कैसे जोड़ना चाहिए जैसी शिक्षा देना चाहिए।अगर  वस्तु को फाड़ कर फेंक दें ,तो उनको वापस  स्थान पर रखने की आदत होनी चाहिए। बच्चे बड़े होने लगते है, तो उनको घर के सारे काम में खुद  से करने की उनके आदत डालनी चाहिए। जिससे वो खुद से हर परिस्थिति का सामना कर सकेंगे।

 

3 –बच्चे को स्वतंत्र बनाये :माता -पिता बच्चों को हर तरह से प्रोटेक्ट करने की होड़ में रहते हैं। खेल के मैदान में दबंग बच्चे जब हमारे बच्चों को चिढ़ाते हैं ,या  पड़ोसी जब बच्चे  को डाँटते  हैं,वो बच्चे जो आपके किड्स को खेल में शामिल नहीं करते हैं।तो पेरेंट्स को उनको ऐसी शिक्षा देनी चाहिए। कि वो अपने प्रॉब्लम को खुद से टैकल करें।जब आपका बच्चा कठिनाई में दिखे ,तो  हमें उनको अकेले ही हर मुशीबत का सामना करने के लिए छोड़ देना चाहिए। जिससे वो हर मुशीबत का सामना आसानी से कर सकेंगे। हमें उनके पीछे हर वक़्त नहीं भागना चाहिए। ताकि वे हर कठिनाई और चुनातियों का सामना खुद से करें ।

 

4 – खुद में तलाशें आतंरिक खुशी :-यह सबसे ज़्यादा जरूरी तथ्य जो आप अपने बच्चे को सिखा सकते हैं। आज के समय में लोग सोशल मीडिया पर निर्भर है। सभी लोग दूसरे के पसंद को ज़्यादा तव्वज़ु देते हैं। हमें अपने बच्चों को बाहरी लोगों के पसंद पर ध्यान न देने जैसी बातों को अपने अंदर न आने दें । उनको ये बताये की खुद में अपनी अच्छाइयों को तलाशने की कोशिश करें। ये ऐसा सीख है। जिससे आप अपने पसंद या न पसंद को खुद से जाहिर कर सकते हैं। बहुत सारी बातें हमारे मन में समायी  होती हैं। जो हमारे पेरेंट्स बार -बार हमारे सामने  रहते हैं।

 

भय  बाहर निकलना :-बच्चे का बचपन भय में व्यतीत हो जाता है। कुछ भय तो बच्चे के साथ से चले आते हैं। जो उनका पीछा ही नहीं छोड़ते जैसे अंधरे से डरना आदि। ऐसे में माता – पिता उनको भय को पीछे छोड़ कर आगे निकलने की सीख देना चाहिए। और उनको भय से मुकाबला करने की हिम्मत बढ़ाना चाहिए। झूंठी तसल्ली ना दें बल्कि उनको सच का सामना करने दें और उस पर विजय को प्राप्त करें।

 

6 –भावात्मक नियंत्रण करना :भावुक होना आम बात है। जब आप बड़े हो रहे हो, तो इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पेरेंट्स बच्चे को इमोशन्स के बारे सबसे पहले बताये। क्योंकि अगर आपका बच्चा भावनात्मक गतिविधियों से जागरूक है तो वो हर परिस्थिति का सामना आसानी से कर सकेगा।

 

7-निराशावादी माहौल से बाहर निकलने की शिक्षा देना:-बच्चे जब निराशाजनक बातें करने लगते हैं |तो माता -पिता को चाहिए। उनको असफलता का सामना करने की ताकत होनी चाहिए। जिससे वो आगे और अच्छा करने की कोशिश कर सकेंगे। और पुरानी बातों को पीछे छोड़ते हुए,अपनी ज़िंदगी नये सिरे से शुरू कर सकेंगे। इससे आपके बच्चे उन दुखदायी बातों को भुला कर,और अच्छी आदतों को अपना कर अपना जीवन सुखमय व्यतीत कर सकेंगे।

 

8- दोषारोपण की आदत से बचें:-कभी -कभी ऐसा होता है बच्चे अपने  किये हुए गलतियों को दूसरो के ऊपर थोपने लगते हैं। जो गन्दी आदत बन जाती है। पेरेंट्स बच्चों को अपनी गलती  मनाने की आदत होनी चाहिए। कि  वो दूसरों  को blame न करें । जो उनको शक्तिशाली बनाएगा और काम को पूरी ईमानदारी से कर सकेंगे। उनको फ्यूचर प्रॉब्लम नहीं होगी।

 

10 –सकारात्मक सोच का होना :-  बच्चों में सकारात्मक सोच की आदत शुरू से डालनी चाहिए है| इससे बच्चों को प्रेरणा भी मिलती रहती है। बच्चे में पॉजिटिव सोच होने से सारे काम सही तरीके से उसके फेवर  में होंगा । जब आप सकारात्मक सोच के साथ कोई  काम करते हैं ,तो आपको ख़ुशी होती  है। अपने काम भी फोकस कर पाते हैं। ऐसी सोच  साथ किये गये कामों में आपको हमेशा के लिए निडर हो कर हर काम करने का साहस मिलता है। और यह  सकारात्मक सोच आपके बच्चे के जीवन में काफी प्रभाव डालता है।

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