कैसे बच्चों को बिगड़ने से बचाया जाए?

बिगड़े बच्चे- पेरेंटिंग रिसोर्सिज़ बाइ ज़ेनपेरेंट

बच्चे आख़िर बच्चे हैं- ये बात हम माँ-बाप और बड़े हमेशा कहते आयें हैं| लेकिन कहीं हमारे बच्चे हमारे लाड़-प्यार में बिगड़ ना जाएँ- ये चिंता हमको हमेशा परेशान करती रहती है| बिगड़े बच्चे वे नही जो कभी-कभी ज़िद्द में आकर किसी चीज़ या बात मनवाने की इच्छा रखें| कई बार माँ-बाप भी ऐसी जायज़ ज़िद्द हंस कर मान लेते हैं, जो कि ग़लत नहीं|

लेकिन किसी ऐसी चीज़ या बात के पूरा होने की इच्छा रखना जो उनके हित में नहीं हो, ऐसा करने पर बच्चों के साथ कैसे पेश आया जाए?

सदैव बच्चों की हर बात और क्रिया पर ध्यान दें– हम बड़े अपने ही जीवन में, ज़िम्मेदारियों के चलते, कई बार इतने व्यस्त हो जाते हैं कि बच्चों की छोटी-छोटी बातों को अनदेखा कर जाते हैं|

बिगड़े बच्चे सुधारें- पेरेंटिंग रिसोर्सिज़ बाइ ज़ेनपेरेंट

ऐसे में अक्सर आपका बच्चा आपसे दूरी महसूस कर, ग़लत रास्ते पर निकल सकता है| इसलिए ये हमेशा ध्यान रहे कि बच्चों के निजी जीवन की हर बात आपको पता हो| और ऐसा करने के लिए आप रौब ना दिखाकर, प्यार से बच्चों से अपना रिश्ता और मज़बूत बनायें ताकि वे भी आपको उनका करीबी मान, आपसे हर बात शेयर करें|

बुरी संगति से दूर– बच्चे चंचल मन के होते हैं और किसी पर भी भरोसा बना बैठते हैं| ऐसे में वे कई बार बुरी संगत में पड़ सकते हैं| और ऐसा होने पर उनको ये समझाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि जिनको वे अपना दोस्त समझते हैं, वो वास्तव में उनका बुरा चाहते हैं| ऐसी में बच्चों को डाँट कर इस समस्या का हल नही निकाला जा सकता है| माता-पिता को बड़े ही प्यार और सहनशीलता के साथ बच्चों से ऐसे लोगों और उनके बुरे आचरण के बारे में बात करनी चाहिए और बुरे कामों के परिणाम भी बताने चाहिए|

कैसे बिगड़े बच्चों को सुधारें- पेरेंटिंग रिसोर्सिज़ बाइ ज़ेनपेरेंट

अच्छे और बुरे में अंतर– बच्चे बढ़ती उम्र में हर अच्छी-बुरी बात को परख नहीं पाते क्योंकि ना वे इतने अनुभवी होतें हैं कि दुनिया में अच्छे-बुरे की पहचान अच्छे से हो जाए और ना ही उनकी समझ इतनी विकसित होती है कि वे हर चीज़ सही ही करें| ऐसे में माँ-बाप ही उनमें इस गुण का विकास कर सकते हैं|उनसे अच्छे-बुरे वाख्यों का वर्णन करें और आस-पास होती हर बात की चर्चा करें| इससे वे भी ये समझने लगेंगें कि उनके लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा|

उनके मन को भी परखें– बच्चे क्या सोचते हैं, क्या महसूस करते हैं, ये जानना भी माँ-बाप के लिए बहुत ज़रूरी है| यदि वे किसी बात से परेशान हैं या किसी दिक्कत या दुविधा में हैं तो उनके हाव-भाव पढ़, उनकी समस्या का हल निकालें|

अनजाने में बच्चों को दोषी ना समझें– बिना जाने-बूझे, बच्चों की ग़लती पर, उन्हीं को ग़लत ना ठहरायें और शांतिपूर्वक बातों को सुलझाएँ| अक्सर बच्चे कुछ जान-बूझ कर ग़लत नहीं करते| इसलिए हर बात को अच्छे से समझना माँ-बाप के लिए ज़रूरी है ताकि पता लग सके कि बच्चा सच में कुछ ग़लत कर रहा है कि नहीं| और यदि कुछ गड़बड़ है तो भी थोड़ी सख्ती और शांति से बिगड़ी बात को बच्चे के साथ मिलकर ठीक करें|

बिगड़े बच्चों को सुधारें- पेरेंटिंग रिसोर्सिज़ बाइ ज़ेनपेरेंट

इमेज सोर्स- गूगल इमेज 

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