जानिए आपके बच्चे के लिए क्या है बेहतर- ग्रुप ट्यूशन या प्राइवेट ट्यूशन

बच्चों की परवरिश का एक अहम हिस्सा बच्चों की पढ़ाई भी है, जिसके लिए अभिभावक खासतौर पर ज़्यादा गम्भीरता और सजगता से सोचते हैं। वैसे तो कई अभिभावक बच्चों को स्कूल के बाद खुद ही पढ़ाते है, पर कुछ अभिभावकों के पास इतना समय नहीं हो पाता कि वो खुद से बच्चे को पढ़ा सकें। ऐसे में उनके सामने एक ही विकल्प बचता है- ट्यूशन। जब बात ट्यूशन की करते हैं तो ट्यूशन के भी दो पैटर्न सामने आते हैं I पहला ग्रुप ट्यूशन जिसमें कई बच्चों को एक साथ पढ़ाया जाता है और दूसरा होम ट्यूशन या पर्सनल ट्यूशन जिसमें केवल आपके बच्चे को ही पढ़ाया जाता है। प्राइवेट ट्यूशन की फीस ग्रुप ट्यूशन की तुलना में ज़्यादा होती है। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने बच्चे को किस तरह की ट्यूशन  दिलवाना चाहते हैं। यह थोड़ा उलझन भरा निर्णय हो सकता है पर परेशान न हो, हम आपको कुछ खास बातें बताने जा रहें हैं जिससे आप आसानी से निर्णय ले पाएंगे –

1. उद्देश्य- सबसे पहले इस बात को स्पष्ट कर लें कि बच्चे को ट्यूशन भेजने का उद्देश्य क्या है। अगर आप बच्चे को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के उद्देश्य से भेज रहें है, तो प्राइवेट ट्यूशन की बजाए ग्रुप ट्यूशन ज़्यादा बेहतर होगा क्योंकि वहां बच्चे को पर्याप्त मात्रा में स्टडी मैटिरियल और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र मुहईया कराए जाते हैं, साथ ही एक विशेष पैटर्न में पढ़ाया जाता है।

2. समय- यह भी ध्यान रखें कि आपके पास कितना समय है? अगर आपके बच्चे को कम समय में ही बहुत कुछ कवर करना है, तो उसके लिए प्राइवेट ट्यूशन ज़्यादा अच्छा रहेगा। क्योंकि प्राइवेट ट्यूशन में आप बच्चे के अनुसार ज़्यादा समय भी पढ़वा सकते है और ट्यूटर भी खासतौर पर एक ही बच्चे पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिससे बच्चे का कोर्स कम समय में पूरा किया जा सकता है।

3. व्यक्तित्व- अगर आपका बच्चा खुल कर बोलता है,समूह में भी प्रश्न पूछने से झिझकता नहीं है, और शर्मिला नहीं  है तो उसके लिए ग्रुप ट्यूशन अच्छा विकल्प है। यहां उसमें एक प्रतियोगी भावना भी जगती है। पर अगर आपका बच्चा शर्मिला है, कम बोलता है, प्रश्न पूछने में झिझकता है तो उसके लिए प्राइवेट ट्यूशन बेहतर होगा।

4. महत्वाकांक्षा- कुछ बच्चों  को खुद से बहुत उम्मीदें होती हैं, तो कुछ ऐसे हैं जो इस बात कि इतनी परवाह ही नहीं करते। अगर बच्चा अपने प्रति जागरूक है, तो वो ग्रुप ट्यूशन में अच्छा प्रदर्शन करेगा क्योंकि वो इस बात पर ध्यान देगा कि उसे सब कुछ मिले । लेकिन अगर बच्चा लापरवाह किस्म का है, तो उसके लिए प्राइवेट ट्यूशन ज़्यादा बेहतर होगा।

5. वर्तमान स्थिति- आपका बच्चा किस विषय में कितना कमजोर है इस बात को भी ध्यान रखें। अगर आपका बच्चा किसी एक विषय में ज़्यादा कमजोर है, तो आपको प्राइवेट ट्यूशन के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि ऐसी स्थिति में उस पर ज़्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी, जो केवल प्राइवेट ट्यूटर ही दे सकता है। पर अगर बच्चा पढ़ने में ज़्यादा कमजोर नहीं है,  उसे बस थोड़ी ही सहायता की जरूरत है, तो उसके लिए ग्रुप ट्यूशन बेहतर होगा।

तो अगर आप इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सोचें कि आपके बच्चे के लिए कौन सा ट्यूशन बेहतर होगा तो आप आसानी से निर्णय ले सकते हैं। इन सब बातों के अलावा एक और बात भी अहमियत रखती है, वो है आपका बजट क्योंकि अगर आप प्राइवेट ट्यूशन के बारे में सोचते हैं तो आपको अपनी जेब थोड़ी ज़्यादा खोलनी पड़ेगी।

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