हर महिलाओं के दिमाग में होती हैं गर्भनिरोधक से जुड़ी ये गलतफहमियां !

वह महिलाएं जो शादी के तुरंत बाद गर्भधारण करने की नहीं सोचती हैं वह ज्यादातर गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग करती हैं। लेकिन, कुछ महिलाएं दवाओं के अलावा भी कुछ गर्भनिरोधक के बारे में ऐसा कुछ सोचती हैं, जिसे दूर करना ही बेहतर समझा जाता है।

हालाँकि, विशेषज्ञों की मानें तो इंटरनेट इस वक्त सेक्स विषयों पर जानकारी का सबसे बडा स्रोत बन गया है। यह सही है कि इंटरनेट से ज्यादा अच्छी कोई लाइब्रेरी नहीं है, लेकिन वहां मौजूद हर जानकारी सही हो, यह कहना उचित नहीं है। डॉ. प्रेमा कहती हैं, जानकारी इकट्ठा करके उन्हें आजमाने से पहले किसी विशेषज्ञ से चेक करना जरूरी है। गर्भनिरोधक से जुडी कुछ आम भ्रांतियों की चर्चा यहां कर रही है सखी।

स्त्री पहली बार इंटरकोर्स में प्रेग्नेंट नहीं हो सकती

यह बात बिलकुल गलत है। एक स्त्री के प्रेग्नेंट होने के चांसेज कुछ स्पेशल केसेज के अलावा हमेशा एक जैसे ही होते हैं। जीएम मोदी हॉस्पिटल, नई दिल्ली की गायनिकोलॉजिस्ट डॉ. मंजू खिमानी कहती हैं, ओव्यूलेशन के प्रॉसेस की शुरुआत के बाद स्त्री कभी भी प्रेग्नेंट हो सकती है। इस बात से कोई फर्क नहीं पडता कि इंटरकोर्स पहली बार है या नहीं। इसलिए अगर कोई सलाह दें कि पहली बार में चिंता करने की जरूरत नहीं है और आप सेफ हैं तो वह गलत है। साथ ही यह भी जान लीजिए कि प्रेग्नेंसी की कोई उम्र नहीं होती। समय के साथ इसकी संभावना कम या ज्यादा हो सकती है, लेकिन किसी उम्र को निर्धारित लिमिट कहना गलत होगा। मेडिकल साइंस में इस भ्रांति को पूरी तरह नकार दिया जाता है और सलाह दी जाती है कि यदि बच्चा नहीं चाहिए तो गर्भनिरोध के विभिन्न तरीकों के बारे में विशेषज्ञ से सलाह करें। डॉ. खिमानी कहती हैं, प्री-मैरिटल काउंसलिंग का रोल ऐसे मामलों में बडा अहम होता है जो शादी के फौरन बाद बच्चा नहीं चाहते। इस काउंसलिंग के बाद कपल के लिए यह तय करना आसान हो जाता है कि वह बच्चा कब और कैसे प्लान कर सकते हैं।

इंटरकोर्स के बाद यूरिनेशन या शावर लेने से प्रेगनेंसी नहीं होती यही

सच्चाई इस भ्रांति से बिलकुल उल्टी है। इंटरकोर्स के बाद यूरिनेशन या शावर लेने का स्पर्म द्वारा एग फर्टिलाइजेशन से कोई संबंध नहीं है। एग फर्टिलाइजेशन के लिए केवल एक स्पर्म की जरूरत होती है। इंटरकोर्स के दौरान कभी भी एग फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। आज के समय में कुछ स्प्रे भी आने लगे हैं जिनके लिए दावा किया जाता है कि उन्हें छिडकने से प्रेग्नेंसी नहीं होती। ये सभी बातें गलत हैं। ऐसे स्प्रे प्रभावी नहीं होते। साथ ही इस तरह के प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करने से पहले किसी कुशल गायनिकोलॉजिस्ट से कंसल्ट करना बेहतर होता है।

यदि पुरुष वजाइना के बाहर इजैकुलेट करे तो प्रेग्नेंसी नहीं होती

यह भ्रांति काफी समय से स्थापित है, लेकिन मेडिकल साइंस इसे पूरी तरह नकारती है। इस तरीके को विड्रॉल कहा जाता है, लेकिन प्रेग्नेंसी रोकने के लिए यह भरोसेमंद तरीका नहीं है। सेक्सुअल इंटरकोर्स के दौरान अराउज होने के बाद पुरुष प्री-इजैक्युलेट फ्लुइड इजेक्ट करते हैं जिसमें 300000 तक स्पर्म हो सकते हैं। ऐसे में विड्रॉल का यह तरीका बहुत कारगर नहीं माना जाता। इसके अलावा वजाइना के आसपान सीमन का प्रवाह भी प्रेग्नेंसी के लिहाज से रिस्की हो सकता है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह गर्भनिरोध का कारगर तरीका है।

पीरियड्स के दौरान सेक्स से प्रेग्नेंसी नहीं होती काफी लोग इस भ्रांति पर यकीन करते हैं लेकिन मेडिकल साइंस इस बात को पूरी तरह नकारती है। स्त्री मासिक धर्म की किसी भी स्टेज में गर्भवती हो सकती है। पीरियड्स होने का मतलब होता है कि ओव्युलेशन का प्रॉसेस नहीं चल रहा है। लेकिन जिन महिलाओं को छोटे या अनियमित मासिक धर्म की शिकायत होती है, उनमें पीरियड्स के दौरान भी ओव्युलेशन हो सकता है। इसके अलावा एक स्त्री के शरीर में स्पर्म पांच दिन तक जीवित रह सकते हैं। इसलिए अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बाद 5 दिनों में अगर ओव्युलेशन होता है तो प्रेग्नेंसी की संभावना बढ जाती है। डॉ. खिमानी कहती हैं, पीरियड्स के दौरान सेक्स से बचना चाहिए, क्योंकि इस दौरान इन्फेक्शन का खतरा बढ जाता है।

बर्थ कंट्रोल पिल्स से कैंसर हो सकता है

बर्थ कंट्रोल पिल्स के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं लेकिन इनसे कैंसर हो सकता है, इस बात को अब तक स्थापित नहीं किया जा सका है। विभिन्न रिसर्चो में इसके विपरीत तथ्य सामने आए हैं। प्लान्ड पेरेंटहुड द्वारा की गई एक रिसर्च के अनुसार पिल्स का प्रयोग करने वाली स्त्रियों में कैंसर विकसित होने की संभावना एक-तिहाई तक कम हो जाती है।

सेक्स के दौरान स्टैंडिंग पोजीशन ट्राई करने से गर्भधारण नहीं होता

सेक्स पोजीशंस को लेकर हमारे समाज में कई गलत धारणाएं हैं, यह भी उनमें से एक है। स्पर्म बहुत तेज स्पीड से शरीर में प्रवेश करते हैं, इसलिए इस तरह के तरीके कारगर नहीं होते।

ऑर्गेज्म न होने से प्रेग्नेंसी नहीं होती

ज्यादातर स्त्रियां मानती हैं कि अगर वे ऑर्गेज्म यानी चरम सुख से बचें तो वे प्रेग्नेंसी से भी बच सकती हैं। मेडिकल साइंस इस धारणा को पूरी तरह नकारती है। डॉ. खिमानी कहती हैं, ऑर्गेज्म का संबंध सेक्सुअल प्लेजर से होता है। प्रेग्नेंसी से इसका कोई वास्ता नहीं है। स्त्री सेक्स की क्रिया एंजॉय करती है या नहीं, इससे उसके गर्भवती होने का कोई संबंध नहीं है। ऑर्गेज्म के बिना भी एक स्त्री सेक्सुअल संबंधों के बाद प्रेग्नेंट हो सकती है।

कॉण्डम तय करता है प्रेग्नेंसी से सुरक्षा

एक बडी अजीब सी धारणा है कि यदि पुरुष टाइट कॉण्डम का प्रयोग करते हैं तो स्त्री के गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है। डॉ. खिमानी कहती हैं, माना जाता है कि टाइट कॉण्डम से प्रेग्नेंसी की संभावना कम हो जाती है जबकि यह सच नहीं है। जरूरत से ज्यादा टाइट कॉण्डम के रप्चर होने की संभावना ज्यादा होती है। इस तरह के गर्भनिरोधकों का प्रयोग करने से पहले पूरी जानकारी जरूरी है। मेरे पास कॉण्डम रप्चर होने से हुई प्रेग्नेंसी के कई केसेज आते हैं। यह कहना गलत है कि कॉण्डम के टाइट होने से प्रेग्नेंसी से बचा जा सकता है।

 

Source:www.onlymyhealth.com

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