हर माँ को पता होनी चाहिए टीकाकरण से संबंधित इस विशेष जानकारी के बारे में

अक्सर आपने देखा होगा कि टीकाकरण से संबंधित बातों पर लोग ज्यादा ही पूछताछ करते हैं लेकिन, इसके बावजूद अपने बच्चे को वैसे टीके नहीं लगवा पाते हैं जो न केवल पेन लेस (दर्द रहित) बल्कि बच्चों के लिए जरूरी भी होता है। ऐसे में ज़ेनपैरेंट ने इस बहस को खत्म करने के लिए, मुंबई के जाने माने डॉ संजीव आहूजा से बात की जो कि एल एच हिरानंदानी अस्पताल में पैडिएट्रिक कंसलटेंट (बाल चिकित्सा सलाहकार) हैं।

 

उनसे हुई बातचीत के दौरान टीकाकरण से संबंधित कुछ मिथ की सच्चाई सामने आई है।  ऐसे में, आप निचे टीकाकरण से संबंधित सारे प्रश्नों के उत्तर को आसानी से जान सकती हैं, जो निम्न हैं-

प्रश्न- नए पेरेंट्स पहली बार टीकाकरण के लिए अपने बच्चे को कैसे तैयार करें ?

उत्तर- कोई विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए आपको शिशु के जन्म के दौरान अस्पताल में दिया जाने वाला टीकाकरण अनुसूची कार्ड को ले जाने की आवश्यकता है। इसके लिए अगले नियत तारीख के बारे में जरूर पता होने चाहिए।

साथ ही सारे टीके जन्म के बाद शिशु को एक योग्य बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा दिए जाने चाहिए वह भी सही जगह पर। क्योंकि, शिशु को टीके जांघ के एंट्रैलेवल (बाहर) के हिस्से में दिया जाता है। इसके अलावा, जिस बात का ध्यान सबसे ज्यादा रखा जाना चाहिए वह है टीके की दवाई का, क्योंकि इसे एक कोल्ड चेन में रखा जाना चाहिए यानि कि इसे उचित तापमान में संरक्षित करने की आवश्यकता होती है। इसलिए पेरेंट्स अपने आप ही टीके न खरीदें।  

प्रश्न- शिशु के जन्म के पहले 3 महीनों में सबसे महत्वपूर्ण टीके कौन से हैं?

उत्तर- सबसे महत्वपूर्ण टीके डीटीपी, एचआईबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, रोटावायरस और न्यूमोकोकल वैक्सीन है।

प्रश्न- डॉक्टर आपने डीटीपी के बारे में उल्लेख किया है, कृपया हमें बता सकते हैं कि यह क्या है?

उत्तर- बच्चों में डीटीपी देने का सीधा सा मतलब है कि यह आपके बच्चे को डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (काली खांसी) से सुरक्षा प्रदान करता है। डीटीपी टीका का पहला सीरीज 6, 10 और 14 वें हफ्ते में जबकि एक बूस्टर 18 महीने और 5 वर्ष की उम्र में दिया जाता है।

प्रश्न- हमने अपनी वेबसाइट पर डीटीपी टीके के प्रकार के बारे में काफी चर्चा होते  देखी है। क्या आप डीटीपी टीकों के प्रकार और उन दोनों के बीच के अंतर को समझा सकते हैं?

उत्तर- प्राइमरी सीरीज में हमारे पास एक्सेलुलर (डीटीएपी) टीका और होल सेल पर्टुसिस वैक्सीन (डीटीडब्ल्यूपी) के बीच एक विकल्प होता है। अक्सर एक बहस होती है, जिस पर एक बेहतर विकल्प होता है और इसका इस्तेमाल किसी के लिए किया जाना चाहिए।

प्रश्न- कुछ  वैक्सीन दूसरे के तुलना में अधिक दर्द क्यों नहीं करती है? और अगर नहीं करती है तो क्या यह प्रभावी है ?

उत्तर- दोनों ही टीके प्रभावी होते हैं लेकिन इंजेक्शन के स्थान पर दर्द, सूजन और अनुभव जैसे साइड इफेक्ट्स एसेल्लुलर-डीटीएपी वैक्सीन के साथ काफी कम हैं।

प्रश्न- कई माओं ने हमें यह विश्वास करने के लिए कहा है कि यदि टीका लगने के बाद शिशु को बुखार होता है, तो इसका मतलब है कि टीका काम कर रहा है, क्या यह सच है?

उत्तर- यह एक मिथ है कि यदि शिशु को दर्द, बुखार और सूजन हो तो टीका अधिक प्रभावी होता  है। यह सच नहीं है, भले ही भले ही कोई लोकल या सिस्टमिक साइड-इफ़ेक्ट न हो लेकिन, एक वैक्सीन पर्याप्त रूप से आवश्यक सुरक्षा प्रदान करता है। यदि कोई पेरेंट्स डीटीएपी के टीके को खरीद सकने में सक्षम हैं सकेंगे, तो मैं अपने पक्ष में इसका उपयोग करने के लिए झुकाऊंगा।  हालांकि, सरकारी क्षेत्र द्वारा उपयोग किया जाने वाला डीटीपीपी वैक्सीन भी प्रभावी होता है और इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

प्रश्न- कैसे कोई पेरेंट्स टीकाकरण के बाद अपने बच्चे को शांत करा सकते हैं ?

उत्तर- टीका के 24 से 48 घंटों के बाद शिशु को पेरासिटामोल की बूंदें दी जा सकती हैं यदि बच्चा चिड़चिड़ा या फिर बुखार से तप रहा हो तब।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सनोफी पाश्चर का एक हिस्सा है जो कि  टीकाकरण के शैक्षिक पहल का हिस्सा है। आर्टिकल में व्यक्त विचार पूरी तरह से डॉक्टर के हैं।

loader