बाह्यमूखी बच्चे (ऐक्स्ट्रोवर्ट) और उनकी सही परवरिश करने के 5 तरीके:

एक्स्ट्रोवर्ट बच्चे- पेरेंटिंग रीसोर्सिज़ बाइ ज़ेनपेरेंट

ऐक्स्ट्रोवर्ट बच्चे सबको पसंद आते हैं, ज़्यादा लोकप्रिय होते हैं सबको अपनी ओर आकर्षित भी करते हैं| आत्मविश्वास ,उर्जा और उत्साह से भरपूर, इन बच्चों को लोगों से मिलना-जुलना अच्छा लगता है और सबके सामने अपनी कला का प्रदर्शन, जैसे – कविता सुनाना, नृत्य करना आदि बहुत ही अच्छा लगता है क्योंकि बाल सुलभ चंचलता और मासूमियत से भरपूर होते हैं| ऐसे बाह्यमूखी बच्चे की उचित तरीके से परवरिश करने के 5 नुस्खे हैं:

1. समुदाय में रहें : बच्चों को एक दूसरे से मिलना जुलना पसंद आता है, इसलिए मेरी एक दोस्त अपना घर छोड़कर अपार्टमेंट में रहने चली गयीं ताकि उनके बच्चे को ज़्यादा दोस्त मिल सके| आप अपने बच्चों का अपने परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों से मेलजोल कराते रहें| बच्चा इससे भावात्मक रूप से ज़्यादा समझदार हो सकेगा जिससे वह सही तरह से ये जान पाएगा कि किससे कैसे बात-चीत करनी है और क्या बोलना सही नही होगा|

2. सीखना-सिखाना : ये बच्चे चुपचाप बैठकर पढ़ने की बजाय कुछ दोस्तों के साथ बैठकर बोल-बोल कर पड़ना पसंद करते हैं| एक दूसरे को समझाने और विचारों के आदान-प्रदान से ये ज़्यादा सीखते हैं| इसलिए इन्हें ग्रूप स्टडी करने दें, चाकबोर्ड देकर उन्हें टीचर बनने दें और और इसमें आप भी भागी-दार बनने का प्रयत्न करें ताकि बच्चों पर आप भी नज़र रख सकें कि जो भी वे कर रहें हैं, वे उनके हित में ही है| ऐसा करने से बच्चा आपके और करीब आएगा और ज़्यादा उल्लास के साथ चीज़ों में और लोगों से घुलने-मिलने में रूचि भी दिखाएगा|

बहुत बोलने वाले बच्चे- पेरेंटिंग रीसोर्सिज़ बाइ ज़ेनपेरेंट

3. किताबों में बच्चों की दिलचस्पी बढ़ाएँ : इन बच्चों को स्टोरी बुक पढ़ने को भी दें, ताकि आपके इन आउटगोयिंग बच्चों को शांति से बैठ कर पढ़ने की भी आदत पढ़े, क्योंकि आगे चलकर, इसकी भी ज़रूरत पड़ेगी| उनकी मनपसंद किताब दें, इंटेरेस्ट जगने पर किताब का टॉपिक बदल-बदल कर दें| ऐसे बच्चों को जीवन के कई रहस्यों का तो पता चलेगा ही और साथ ही वे स्वयं भी लोगों के अनुभवों को समझ, खुद भी बदलती परिस्तिथियो के हिसाब से, ज़िंदगी का सामना अच्छे से कर पाएँगें|

4. सक्रियता बढ़ायें : ऐसे बच्चों को ड्रामा, खेल और ग्रूप अक्टिविटी में बहुत आनंद आता है| इसलिए खुद कोशिश करें कि कूछ-कुछ ऐसे प्रोग्राम बच्चों को बीज़ी रखें|

5. बातचीत करें: यह सभी बच्चों के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप उनसे निरंतर संवाद करें| अगर आप खुद इंट्रोवर्ट हैं तो यह थोड़ा सा मुश्किल हो सकता है, लेकिन आपके बच्चे के लिए आपकी कही हुई बातों का ज़्यादा असर पड़ेगा| और आप उनकी बातें सुनने के लिए हमेशा तैयार रहें|

कोई भी बच्चा पूर्ण रूप से एक्स्ट्रोवर्ट या इंट्रोवर्ट नही होता| और बच्चा भी उम्र के साथ बदलता रहता है| इसलिए बच्चा किस दौर से गुज़र रहा है, उसे समझ कर, उस समय के अनुसार बरताव करें|

इमेज सोर्स : गूगल इमेज़ीज़

 

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