इन 4 कारण से नवजात शिशु होते हैं कम वेट वाले

नवजात शिशु में वेट कम होने के कारण | Nawjat shishu men weight kam karne ke karan

जन्म के समय जिस बच्चे का वजन 2.5 से कम होता है, तो ऐसे शिशु कम वजन वाले की श्रेणी में आते हैं। ऐसे बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में आकार में छोटे होते हैं। साथ ही ऐसे बच्चों को अन्य बच्चों की तुलना में अधिक देखभाल की जरूरत होती है।

हालाँकि, शिशु का वजन उसकी लम्बाई पर भी निर्भर करता है। इसलिए जन्म के समय यह जांचना बेहद जरूरी होता है कि शिशु का वजन सामान्य है या नहीं। शिशु का वजन उसकी लम्बाई के अनुरूप कम या ज्यादा हो सकता है। लम्बाई के कारण वजन कम होना कुपोषण का संकेत होता है।

ऐसे में, निचे कुछ बातों को ध्यान में रख कर इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आख़िरकार जन्म के समय कुछ शिशु का वजन क्यों कम होता है, जिनमें निम्न शामिल हैं-

समय से पहले शिशु का जन्म

वैसे शिशु जो गर्भवस्था के 37वें हफ्ते में ही पैदा हो जाए उसे प्रीमैच्योर बेबी कहते हैं। ऐसे शिशु का वजन अन्य की तुलना में कम होता है, और वह कमजोर भी होते हैं। ऐसे में, इस तरह के शिशु को विशेष देख-रेख की जरूरत होती है।

जुड़वाँ की स्तिथि होने पर

वह महिला जो एक या उससे अधिक बच्चों के साथ गर्भवती होती हैं, उनके बच्चे का वजन कम होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि, उन्हें गर्भ में विकसित होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है। साथ ही, जुड़वां या इससे अधिक शिशु अक्सर जल्दी पैदा होते हैं जिस कारण उनका वजन कम होता है।

बीमारी के कारण

कई बार शिशु किसी बीमारी के कारण भी छोटे होते हैं। क्योंकि, बीमारी के कारण शिशु का विकास पूर्ण तरीके से नहीं हो पाता है जिस कारण उनका वजन कम होता है।

प्रीएक्लेम्पसिया के कारण

प्रीएक्लेम्पसिया के कारण भी शिशु तक जितना रक्त का प्रवाह होना चाहिए उतना नहीं हो पाता है। जिस कारण पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व न मिलने से शिशु का सही प्रकार से विकास नहीं हो पाता है। जिससे कि जन्म के समय शिशु का वजन कम होता है।

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