धनतेरस का त्योहार मनाने के पीछे कारण

हिंदू धर्म में धनतेरस का त्‍यौहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, धनतेरस के दिन से ही दिवाली की शुरुआत हो जाती है, जो भाई दूज के साथ समाप्त होता है। धनतेरस का दिन इसलिए भी खास है, क्योंकि इस दिन कोई भी नया बर्तन खरीद कर लाया जाता है, या फिर चांदी अथवा सोने का सिक्‍का लाया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। हिंदु मान्यता के अनुसार इस दिन पुजा करने से धन की कमी नही होती है और हमेशा सुख-शांति बनी रहती है।

सामान्यतौर पर धनतेरस के दिन, मां लक्ष्‍मी के साथ-साथ भगवान कुबरे की भी पूजा की जाती है। इसके अलावा इस दिन का क्या महत्‍व है, इस बारे में जानना बहुत जरूरी है, जो निचे दिए जा रहें हैं-

धनतेरस के बारे में दो दंतकथाएं बताई गयी हैं, ऐसा माना जाता है‍ कि समुद्र मंथन के दौरान, समुद्र से निकलने वाले नौ रत्‍नों में इसी दिन वैद्य धन्‍वतर का जन्‍म हुआ था। इस त्‍यौहार को हिंदू धर्म में बड़े त्‍यौहार के रूप में जाना जाता है।

धनतेरस से जुड़ी एक दूसरी कथा है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवताओं के कार्य में बाधा डालने के कारण भगवान विष्णु ने असुरों के गुरू शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी। कथा के अनुसार, देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था।

इसके अलावा, व्‍यापारियों के लिए धनतेरस का बहुत बड़ा महत्‍व होता है। इस दिन नई किताबें, सामान आदि खरीदा जाता है। कई लोग नए पेशे को भ इस दिन शुरू करना शुभ मानते हैं।

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