डेंगू से कैसे बचें

डेंगू से कैसे बचें

डेंगू एक जानलेवा बीमारी है जोकि मच्छरों के काटने से फैलती है। इन दिनों भारत में डेंगू के कई सारे मरीज पाये जा रहे हैं और उनमें से कुछ लोगों के लिए यह उनकी मौत का कारण भी बना है। डेंगू होने पर घबराने की जरुरत बिलकुल भी नहीं है। आपको सिर्फ डॉक्टर के बताये गए ट्रीटमेंट को समय पर करवा लेना चाहिए और पूरा परहेज़ रखना चाहिए। डेंगू के बारे में कुछ अन्य बातें निम्न हैं:

डेंगू फीवर क्या है?

मादा एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से डेंगू फैलता है। डेंगू फीवर फैलाने वाला वायरस मुख्य रूप से 4 प्रकार का होता है। अगर कोई एक व्यक्ति किसी एक प्रकार के डेंगू रोग से इलाज के दौरान बच जाता है तो उसके शरीर में इतनी प्रतिरोधक क्षमता आ जाती है कि उसे दुबारा उसी प्रकार का डेंगू कुछ समय तक नहीं होगा, लेकिन अन्य 3 प्रकार के डेंगू में से कोई भी एक हो सकता है। दूसरी बार होने वाला डेंगू बहुत ज्यादा घातक होता है और इसे डेंगू हेमोरहगीक फीवर कहा जाता है।

डेंगू फीवर कैसे फैलता है?

डेंगू कोई संक्रामक बीमारी नहीं है, जो कि रोगी के छींकने या खाँसने से फैले। ये मच्छर के काटने से फैलती है। मादा एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से डेंगू होता है। अगर डेंगू रोगी के शरीर से कोई मच्छर खून पीता है तो वो भी डेंगू वायरस युक्त मच्छर बन जाता है और लोगों को डेंगू का रोगी बना देता है। डेंगू वायरस युक्त मच्छर की निम्न पहचान होती है –

  • ये दिन के समय ज्यादा सक्रिय होते हैं।  
  • इनके शरीर पर आपको धारी दिखेगी।
  • अधिकतर अँधेरी जगहों पर ही ये मच्छर पाये जाते हैं।  
  • प्रजनन क्षेत्र के 200 मीटर की परिधि में ही ये मच्छर उड़ते हैं।
  • ये ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते हैं।

डेंगू फीवर के लक्षण – डेंगू फीवर के लक्षण निम्न प्रकार हैं।

  • सर्दी  के साथ तेज़ बुखार आना।
  • उल्टियां होना
  • आँखों में दर्द
  • बदन दर्द
  • दस्त
  • स्किन पर लाल चक्कते पड़ जाना
  • डेंगू हेमोरहगीक फीवर होने पर नाक से खून भी निकल सकता है।

टेस्ट: डेंगू वायरस का पता लगाने के लिए डॉक्टर द्वारा कुछ विशेष प्रकार की जाँच की जाती हैं जोकि काफी मंहगी होती हैं।  सरकारी अस्पतालों में इन्हें कम कीमत पर किया जाता है।

इलाज:  डेंगू का इलाज काफी मंहगा होता है और रोगी को ठीक करने में काफी धनराशि खर्च हो जाती है।

  • वायरस वाली बीमारी होने की वजह से अभी तक डेंगू के लिए कोई सटीक वैक्सीन नहीं बनी है।
  • इसलिए रोगी के लक्षणों के आधार पर ही इलाज किया जाता है और सिरदर्द, फीवर आदि की दवा दी जाती है।  
  • रोगी के शरीर को डिहाइड्रेट रखने के लिए उसे पानी पिलाया जाता है।  
  • समय-समय पर रोगी का प्लेटलेट काउंट जांचा जाता है और कम होने की दशा में उपचार किया जाता है।

बरती जाने वाली सावधानी:

  • खुले में मच्छर लोशन आदि को लगाकर बैठें।  
  • आसपास गंदगी या गन्दा पानी न जमा होने दें।  
  • घर में कीटनाशक का छिड़काव करें।
  • कूलर आदि में भरा हुआ पानी निकाल दें।
  • रात को मच्छरदानी लगाकर सोएं।
  • बच्चों को शरीर पूरा ढकने वाले कपड़े पहनाकर ही सुलाएं।

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