सीजेरियन डिलिवरी के बाद महिलाओं में होने वाले जोखिम

सीजेरियन डिलिवरी, नार्मल डिलीवरी से बहुत ज्यादा कष्टदायी होती है, क्योंकि इससे महिलाओं को लंबे समय तक झूझना पड़ता है। हालाँकि, यह एक ऐसी सर्जरी होती है, जिसमें बच्चें को पेट पर चीरा लगा कर बाहर निकाल लिया जाता है। वैसे तो सीजेरियन डिलिवरी कराना, सुरक्षित होता है और डिलिवरी के बाद, माँ और बच्चें के स्वास्थ्य पर कोई खास बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन फिर भी इसके बाद महिलाओं को बहुत अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

हालाँकि, सीजेरियन डिलिवरी के बाद होने वाले जोखिम को निचे बताएं जा रहे हैं, जो निम्न हैं-

  • ऑपरेशन वाली जगह में संक्रमण का खतरा।  

  • इस प्रकार की डिलिवरी से महिला का शरीर ज्यादा कमजोर हो जाता है क्योकि, इस दौरान रक्त की हानि होती है।

  • एनेस्थीसिया के कारण, डिलिवरी के बाद, मतली, उल्टी, गंभीर सिरदर्द की समस्या होना।

  • पेट में परेशानियाँ होना, जैसे- कब्ज की समस्या, पैरालाइटिक इलेयुस

  • सर्जरी के दौरान, दूसरे अंगों को भी नुकसान हो सकता है जैसे- मूत्राशय को।

इतना ही नहीं, सीजेरियन डिलिवरी के बाद होने वाले जोखिम का सामना न केवल माँ को करना पड़ता है, बल्कि इससे बच्चे को भी गुजरना पड़ता है, ऐसे ही कुछ जोखिम निचे बताए जा रहें हैं, जो निम्न हैं-

  • शिशु को डिलिवरी के दौरान चोट लगने का खतरा।

  • शिशु को संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है।

  • डिलिवरी के बाद, शिशु की बहुत ज्यादा देखभाल करनी पड़ती है।

  • शिशु गर्भ के 39 सप्ताह से पहले ही जन्म ले लिया है तो शिशु में सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या भी देखने को मिलती है।

मॉर्डर्न मोना- मदर लाइफस्टाइल! एक दैनिक कॉलम, जहाँ महिलाओं से संबंधित पूरी जानकारी दी गई है।  जैसे- स्वास्थ्य, फैशन, फिटनेस, बच्चों का रख-रखाव, मनोरंजन, सेक्स आदि की जानकारी के लिए आप अपने सवाल इस ईमेल https://zenparent.in/communityपर भेज सकते हैं।

loader