ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने का सबसे नया और यूनिक तरीका, जरूर आजमाएं महिलाएं

शिशु के जन्म के बाद माँ की जिम्मेदारी अपने बच्चों के लिए काफी बढ़ जाती है। खासकर, अगर स्तनपान की बात करें तो इन दिनों शिशु पूर्ण रूप से माँ के दूध पर निर्भर रहता है। लेकिन, इसके लिए यह बेहद जरूरी है कि माँ अपने नवजात शिशु को समय-समय पर स्तनपान कराएं। लेकिन, कुछ महिलाओं में दूध का उत्पादन कम होता है जिसके कारण शिशु का पेट नहीं भरता है। अब बात यह आती है कि कैसे पता चलेगा कि शिशु भूखा है।

कैसे पता करें कि नवजात भूखा है ?

यह बिल्कुल सच है कि इन दिनों नवजात शिशु को कुछ बोलना नहीं आता है और वह अपनी बातों को रो कर कहते हैं। ऐसे में, जब शिशु भूखे होते हैं तब वह रोना शुरू कर देते हैं। साथ ही, जब शिशु भूखे होते हैं तब उनका होंठ और मुंह सूखने लगता है। ऐसे में, आपको यह समझना चाहिए कि आपका शिशु भूखा है।

कैसा पता चलेगा कि मेरे शिशु को उचित मात्रा में दूध मिल रही है ?

जब आपमें दूध की आपूर्ति अच्छे तरीके से होती है तब आपको स्तनपान के दौरान किसी भी तरह का कोई दर्द महसूस नहीं होता है और दूध पिलाने के बाद आपको काफी हल्का महसूस होता है। वहीँ दूसरी ओर जब आप शिशु को दूध नहीं पिला पाती हैं तब आपको दर्द और सूजन महसूस हो सकता है।

कैसे पता चलगा कि शिशु का पेट भर गया है ?  

शुरुआत में शिशु कम से कम 8 बार माँ का दूध पीते हैं। हालाँकि, स्तनपान के दौरान आपको यह ध्यान देना होगा कि क्या शिशु ने अच्छे से दूध पीया है या नहीं। जब शिशु दूध पी रहे होते हैं तब उनके गले से निचे दूध जाने की आवाज आप साफ सुन सकते हैं। इसके अलावा, यदि आपके शिशु दूध पिने के बाद नहीं रोते हैं तब यह समझना चाहिए कि शिशु का पेट भर गया है।

दूध बढ़ाने के क्या तरीके हैं ?

स्तनपान के दौरान जब शिशु को उचित मात्रा में दूध की आपूर्ति न हो रही हो तब आप इन तरीकों से दूध की आपूर्ति को बढ़ा सकती हैं, जो निम्न हैं-

मसूर की दाल

मसूर की दाल माँ में दूध की आपूर्ति को बहुत ही तेज़ी से बढ़ाने का काम करता है। ऐसे में आप रोजाना खूब सारा दाल पियें क्योंकि, ये प्रोटीन का भी अच्छा स्त्रोत माना जाता है और इनमें आयरन और फाइबर भी उच्च मात्रा में होता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

माँ में दूध की पूर्ति को बढ़ाने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां एक बेहतर विकल्प है। इसके लिए आप अपने आहार में पालक, मेथी, सरसों का साग और बथुआ आदि आयरन, कैल्श्यिम और फोलेट जैस खनिजों का सेवन कर सकती हैं। इनमें बीटाकैरोटीन (विटामिन ए) का एक रूप और राइबोफ्लेविन जैसे विटामिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं।  

सूखे मेवे

बादाम, काजू और पिस्ता जैसे मेवे स्तनों में दूध की मात्रा को बढ़ाते हैं। साथ ही ये मेवे विटामिन, मिनरल और प्रोटीन से भी भरपूर होते हैं। इन्‍हें कच्‍चा खाने पर ज्यादा लाभ होगा। इसके अलावा आप इन्हें दूध के साथ भी ले सकती हैं।

लहसून

लहसुन खाना मां के लिए अच्छा होता है। इसे खाने से भी दूध बनाने की क्षमता बढ़ती है। लहसुन को कच्चा खाने की बजाए उसे मीट, करी, सब्‍जी या दाल में डाल कर पका कर खाएं। अगर आप लहसुन को नियमित खाती हैं तो आपको लाभ अवश्य होगा।

हालाँकि, शिशु में स्तन दूध की आपूर्ति उसके वजन पर निर्भर करता है, क्योंकि जन्म के कुछ ही दिन बाद शिशु के वजन में काफी फर्क नजर आने लगता है। खासकर, जब उसे माँ का दूध उचित तरीके से मिल पा रहा हो। हालाँकि, जन्म के बाद शिशु का कुछ वजन कम भी हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शिशु को दूध नहीं मिल रहा है।

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