बेटे को बनाएं जेंटिलमेन

सरकारी विज्ञापन में अक्सर हम बेटा-बेटी एक समान की लाइन पढ़ते हैं। असल जिंदगी में ये बात मुश्किल से नज़र आती है। बेटे की परवरिश में लोग इतना ध्यान नहीं देते हैं। वहीं बेटियों की परवरिश में हर मां कहा जाता है कि इसे अच्छी आदतें सिखाओ। इसे दूसरे के घर जाना है। ये शिकायत अब दूर हो रही है। आज पढ़े लिखे और समझदार पैरेंटस दोनों को एक जैसी परवरिश ही देते हैं। यहां हम बात कर रहें हैं बेटों की पैरेंटस की, वो नहीं चाहते कि उनका बेटा मौनमौजी हो। किसी का आदर न करे। समय के साथ पैरेंटस की सोच भी बदली है। चलिए जानते हैं कैसे करते हैं आज के लोग बेटे की परवरिश और क्या सीखाते हैं उसे जेंटिल मैन बनाने के लिए।

कुल का चिराग ही नहीं, सज्जन भी हो बेटा

 

क्यों खास है बेटे की परवरिश- माना जाता है बल और बु़िद्ध अगर साथ हो जाएं तो दोगुना विकास होता है। ऐसा ही कुछ बेटों के लिए भी है। बेटे को अगर बचपन से ही लोगों की इज़्जत करना सीखाया जाए तो हमारे आसपास बहुत कुछ बदल सकता है। हर रोज़ अखबार, टीवी चैनल और वेब पर हम लांखों हजारों की तादाद में ऐसी ख़बर देखते सुनते हैं। जिसमें कहीं न कहीं मेल चाइल्ड की छवि खराब होती है। इसमें कहीं न कहीं परवरिश बहुत मायने रखते ही। हर मां-बाप की चाहत होती है। उनका बच्चा उनका नाम रोशन करे बदनाम नहीं।

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आसान नहीं है ये काम- उसे ये बताना बहुत जरूरी है कि दुनिया किसी एक के लिए नहीं है। सब कुछ दोनों का बराबर है। फिर चाहे वो आॅफिस में काम करना हो या ड्राइविंग करना। किसी में भी औरत, बहन, दोस्त या गर्लफ्रेंड को कम न समझे। इसकी नींव बच्चे में बचपन से ही डालनी होगी। आप वर्किंग मदर हैं तो बच्चे से आॅफिस की बातें शेयर करें। उसको अपने पुरूष और महिला मित्रों के बारें में बताएं। कैसे आपके दोस्त आपकी मदद करते हैं। उसे ये भी बताएं कि उनकी क्या बातें आपको बुरी लगती है।

 

खुद की पहचान कराएं- बच्चे को ये भी सिखाएं सबकुछ मां या पापा नहीं करते हैं। खुद से बहुत कुछ करना पड़ता है। तभी जि़दगी का आनंद लिया जा सकता है। उसके लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि वो औरत या पत्नी को दायरे में रखने की कोशिश न करे। मेहनत करना सिखाएं।

 

खुद से करे अपना काम- बेटों को अक्सर हर चीज हाथ में लेने की आदल डाल दी जाती है। जोकि गलत है अगर अपने बेटे को आदर्श पुरूष बनाना चाहते हैं तो उसे उसके काम खुद करने दीजिए। इसके लिए उसे नाश्ता लेना, खुद से नहाना, अपने बाल बनाना आदि सिखाएं।

मेल- जोल बढ़ाएं– बेटे को उसकी उम्र के बच्चे से मिलाएं। इस बात का जरूर ध्यान रखें कि जिस बच्चे से आप मेल-जोल बढ़ा रहे हैं। उसके पेरेंट्स भी अपने बेटे में अच्छी आदतें डाल रहे हैं। इससे उसे घर के बाहर भी बेहतर माहौल मिलेगा।

बताएं आदर्श पुरूषों के बारे में- बेटे को आदर्श पुरूषों के बारे में बताएं। इसके लिए उसे टीवी, मूवी या बुक दें। जहां वो अच्छी आदतें सीखेगा।

अच्छी आदतें- बढ़ती उम्र में ही बच्चे को ये आदतें डालें। उसे धन्यवाद, साॅरी और प्लीज़ कहना सिखाएं। इसके साथ ही उसे बड़ों आदर सम्मान करना सिखाएं।

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