बच्चों की जरूरत को पूरा करें ना की ज़िद  को 

 

 

 

 

 

 

अपने बच्चों के चेहरे पर मुस्कान हर माता-पिता देखना चाहते हैं। उनकी हर संभव कोशिश ये रहती है की अपने बच्चों की हर छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करें। खासकर मध्यम वर्ग के लोगों में यह ज्यादा देखा गया है। वह अपने बच्चों की हर जरूरतों को पूरा करते हैं जैसे की फ़ोन, प्ले स्टेशन  या आई-पैड के रूप में। ऐसे में देखा जाये तो बच्चों का डिमांड दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। वहीं  किसी वजह से  पेरेंट्स इन जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते हैं  तो वह अपने बच्चों के नजर में बुरे बन जाते हैं। ऐसे में जरूरत है अपने बच्चों को समझाने की, क्योंकि ये बिल्कुल सही है कि आप अपने बच्चों की जैसी परवरिश करोगे वह वैसा ही होगा। इसलिए अपने बच्चों की जरूरतों को पूरा करें ना की उनके जिद को।

 

पैसे देना – कुछ माता-पिता अपने बच्चों को भत्ता ( पॉकेट मनी)  देना उचित नहीं समझते हैं।वो चाहते हैं की उनका बच्चा आकर उनसे उन्हें अपनी ज़रूरत बताये। वंही कुछ पेरेंट्स का मानना है की बच्चों को पैसे देने चाहिए ताकि उन्हें समझ में आएगा की पैसों को कहाँ पर और कितना ख़र्च करना है। इसके साथ ही यदि आप अपने बच्चों को भत्ता देते  हैं, तो पूछना ना भूलें की उन्होंने कितना  और कहां ख़र्च किया ।

 

 

मेहनत से कमाने की प्रेरणा- जब भी आपके बच्चे आपसे पैसे की डिमांड करें तो उन्हें मेहनत से कमाने की सलाह दें। उन्हें टास्क दें जिससे वो पैसे कमा सकें । उदाहरण के तौर पर ,यदि आपके दो बच्चें हैं उनमें से  एक की मैथ्स बहुत अच्छी  है और एक की नहीं। ऐसे में आप उन्हें मैथ्स पढ़ाने की सलाह दें और उनसे कहें की इसके बदले उन्हें मेहनताना दिया  जायेगा । इससे  वह पैसों की अहमियत को समझेगा और सोच-समझ कर खर्च करेगा।

 

प्यार से करें इंकार – यदि आपका बच्चा  यह कह कर आपसे पैसे माँगें कि उनके दोस्त के पास मोबाइल है और उन्हें भी चाहिए तो आप उसे समझा दें  । सीधे तौर पर मना करने पर उनको बुरा लग सकता है । क्योंकि आपके बच्चे को इस समय फ़ोन की कोई जरूरत नहीं है  । इतना ही नहीं फेसबुक अकॉउंट पर भी उनको समझाएं की ,अभी उनको पढाई पर फोकस करने की ज़रूरत है। आप अपने बच्चों के डिमांड  को गहराई में जाकर सोचे की क्या उन्हें सच में उसकी जरूरत है।

 

आभार प्रकट करना– अपने बच्चों में आभार प्रकट  या धन्यवाद करने की आदत डलवाएं। जो वो वह आपसे प्राप्त करता है ।

 

 

बाहरी दुनिया से अवगत करायें- अपने बच्चों को साल में एक या दो बार अनाथ आश्रम ले कर जाएँ और उन्हें यह दिखाने की कोशिश करें की ये सारे अनाथ बच्चे अपना जीवन कैसे जी रहें हैं। तो शायद उन्हें असलियत और वास्तविकता का पता चलेगा।

 

हालाँकि जब बच्चे अपने पेरेंट्स को अपनी जरूरतों का सामान जैसे टीवी या कार ख़रीदते देखते हैं ।  वंही दूसरी तरफ उनके डिमांड को पेरेंट्स के जरिये मना कर दिया जाता है , तो कहीं न कहीं दुखी होते  हैं।  वो ये सोचते हैं की उनके माँ पापा उनके लिए पैसे नही खर्च करना चाहते हैं  ।

ऐसे में हर पेरेंट्स के लिए यही उचित समय है अपने बच्चों में बचत की आदत डालें । क्योंकि बचत करना बहुत अच्छी आदत है । इससे वो भविष्य की बेहतर योजना बना पायेगा । क्योंकि बचत करना बहुत अच्छी आदत है । इससे वो भविष्य की बेहतर योजना बना पायेगा ।

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