बच्चों के लिए बेहद ख़ास होती है माँ सरस्वती की पूजा

माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि विद्या, बुद्धि व ज्ञान की देवी सरस्वती माँ का आविर्भाव इसी दिन हुआ था। इसलिए आज के दिन उन सारे स्टूडेंट्स माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। क्योंकि, इससे बच्चों को पढ़ने की शक्ति मिलती है। शायद आपको पता होगा कि माँ सरस्वती को समस्त ज्ञान, साहित्य, संगीत, कला की देवी माना जाता है। इसलिए आपने देखा होगा कि शिक्षण संस्थाओं में वसंत पंचमी बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है।

इसके अलावा, भी कई कारणों से आज का दिन शुभ माना जाता है-

बच्चों के पढ़ाई की शुरुआत

आज के दिन उन बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो पहली बार पढ़ने-लिखने की ओर अपना कदम बढ़ाते हैं। इसलिए इस दिन बच्चों को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है, और उन्हें माँ सरस्वती के सामने उनके उज्व्वल भविष्य की कामना की जाती है।

शुभ कामों के लिए अच्छा

हिंदूओं के पौराणिक ग्रंथों में भी इस दिन को बहुत ही शुभ माना गया है, और हर नए काम की शुरुआत के लिए यह बहुत ही मंगलकारी माना जाता है। खासतौर से विद्या की शुरुआत, घर की नींव से लेकर गृह प्रवेश तक इस दिन किए जाते हैं।

पीले कपड़े पहनना

आज के दिन पीले कपड़े पहनने की प्रथा है, क्योंकि बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही बसंत पंचमी सर्दियों के मौसम के अंत का प्रतीक होता है। हर कोई बहुत मज़े और उत्साह के साथ इस त्यौहार का आनंद लेता है।

बसंत ऋतु का आगमन

शीत ऋतु के बाद बसंत ऋतु का आगमन होता है। यह मौषम बहुत ही मनोभावन होती है। क्योंकि, इस मौसम में खिली-खिली धुप, पेड़ों पर नए-नए पत्ते लगने शुरू हो जाते हैं।

इसके अलावा, आज के दिन बच्चों को उच्चारण सिखाने के लिहाज से भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, जो बच्चे 6 महीने पूरे कर चुके हैं उन्हें अन्न का पहला निवाला भी इसी दिन खिलाया जाता है।  

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