बच्‍चे के चिड़चिड़ेपन को भूलकर भी न करें नज़रअंदाज़

Published On  September 7, 2016 By

बच्चों का रोना बेहद आम बात है लेकिन, जब आपका बच्चा ज़रूरत से ज्यादा रो रहा हो तब यह सामान्य नहीं माना जाता है। क्योंकि, ज्यादातर पेरेंट्स बच्चों के इस व्यवहार को गंभीरता से नहीं लेते हैं, जो आगे चलकर बहुत बड़ी मुसीबत पैदा कर सकती है। हालाँकि, एक शोध में यह बात सामने आई है कि बच्चे का बेवजह रोना किसी गंभीर मानसिक बीमारी का संकेत हो सकता है।

 

इसके अलावा भी कई ऐसे कारण हैं जो बच्चों के चिड़चिड़ेपन के लिए ज़िम्मेदार हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं-

 

  • नींद की कमी- कभी-कभी छोटे बच्चे को जितनी नींद लेनी चाहिए उतनी नहीं मिल पाती है, जिस कारण उनमें चिड़चिड़ापन घर कर जाता है। ऐसे में कोशिश करें कि बच्चे को उनकी नींद पूरी होने दें, साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि उनका कमरा एकांत में हो। क्योंकि, छोटे बच्चे शोरगुल में नहीं सो पाते हैं, वह शांत हो कर सोना पसंद करते हैं।

 

  • शारीरिक थकावट और भूख- जब आपका बच्चा शारीरिक रूप से थका और और भूखा रहता है, तब उसका रोना और चिड़चिड़ाना संभव है। ऐसे में बच्चे को समय-समय पर फीड कराएं साथ ही उसके शरीर की मालिश करें। क्योंकि, नवजात शिशु को मालिश के साथ-साथ बार-बार फीड कराने की जरूरत पड़ती है।

 

  • शारीरिक तकलीफ- छोटे बच्चे को समझना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि वह अपनी तकलीफ को किसी से कह नहीं पाते हैं। खासकर, जब बच्चे को किसी प्रकार की कोई शारीरिक तकलीफ हो रही हो, जैसे-पेट में दर्द या कान में दर्द। क्योंकि, बच्चे अपने इस दर्द को रो कर व्यक्त करते हैं, जिससे कि वह कभी-कभी चिड़चिडे भी हो जाते हैं। ऐसे में एक माँ होने के नाते आप उनकी तकलीफ को समझने की कोशिश करें।

 

  • बच्चे रोकर बताते हैं अपनी जरूरत- ज्यादातर छोटे बच्चे हर रोज एक घंटे से लेकर तीन घंटे तक रोते हैं। इसके पीछे कारण यह है कि आपका बच्चा अपने आप खुद कुछ नहीं कर सकता है और वह अपनी हर जरुरत के लिए आप पर ही निर्भर है इसलिए वह अपनी बात रो-रो कर ही बताने की कोशिश करता है।

 

हालाँकि, ऐसे में आप बच्चे की हर गतिविधि‍ पर नजर रखें, क्योंकि जब आपके शिशु में चिड़चिड़ापन अक्सर होने लगे तो इसका अर्थ है कि वह मानसिक रूप से संघर्ष कर रहा है।

 

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