बच्चों को ऐसे बनाये अनुशासित

जब इन्सान की शादी हो जाती है, तो उनके  अंदर काफी बदलाव आ जाता है। घर से बाहर तक की जिम्मेदारी हो जाती है। अब बात आती है फैमिली प्लानिंिग की  हर  किसी की ख्वाहिश होती है, कि उनको  पिता या माँ कहलाने वाला हो। जब आप पेरेंट्स के फ़ॉर्म में आ जाते हैं, तो आपके बच्चों को किस तरह से उनके गतिविधियों पर ध्यान दिया जा सके। जिसके लिए सबसे ज़्यादा जरूरी है, कि हम बच्चों को शुरू से अनुशासन में रखें। जिसके लिए माता -पिता को काफी मेहनत करनी होगी।ताकि आपका बच्चा अनुशासन को फॉलो करे। पेरेंट्स का बच्चो के एक्टिविटी पर ध्यान दें शादी से पहले लोग केवल अपने बारे में सोचते है। बड़े लोग कभी -कभी खुद भी अनुशासनहीन होते है, लेकिन शादी होने के बाद चाहे वो लड़का हो या लड़की सब कुछ बदल जाता है। लकड़ी को घर की संस्कारी बहु बनके रहना होता है। इन सब  बात को ध्यान में रख कर आपको घर के बाकी लोगों की जिम्म्मेदारियाँ भी होती है। जिसके लिए पति -पत्नी को बराबर  हिस्सेदारी होनी चाहिए। बच्चे हो जाने के बाद जब आप माँ -बाप होते हैं। बच्चों को सही गलत की पहचान कराना हर  माँ- बाप की जिम्मेदारी होती है। ताकि बच्चा गलत रस्ते पर न जाये जिसके लिए पेरेंट्स हर वक़्त सजक रहने की जरूरत होती है।बचपन से अगर बच्चों को अनुशासन में रखा जाये, तो उनके ज़िन्दगी में कभी कोई दिक्कत नहीं आयेगी। आइये देखते है कुछ ऐसे सुझाव जिससे आपको बच्चों को अनुशासित बनाने में मदद मिल सकती है-

  •  पेरेंट्स बच्चों के साथ अनुभव अवश्य  शेयर करें। जिससे बच्चे अनुभव के महत्व को समझ सकें और अपने लाइफ आसानी से जी सकेंगे।
  • बच्चों के खान -पान पर विषेश ध्यान देना और साथ में ये भी बताये कि किस खाद्यपदार्थ से क्या -क्या विटामिन या प्रोटीन प्राप्त होता है। ताकि बच्चे अगर बाहर मार्केट जो भी खुद से खाये तो आपके के बताये गए बात पर अम्ल करके ही किसी खदायपदार्थ को  हाथ लगाएंगे।
  • पेरेंट्स बच्चोंकी  स्टडी टाइम को फिक्स कर दें। साथ में ये माइंड मेकअप में रहे कि कितने घंटे तक पढ़ना है और कितने घंटे तक खेलना है। जब पेरेंट्स बच्चों को सारी  बातें शुरू से अादत में डाल देंगे तो आगे चल कर उनको किसी बात की टेंशन नहीं होगी।
  • बच्चे जब गलतियाँ करें,तो पेरेंट्स को चाहिए कि उनको पहले प्यार से समझाये नाकि उनके ऊपर बरस पड़े। बच्चों में कोई समझ नहीं होती है जिससे उनसे गलतियां हो जाती है।  माता -पिता  बच्चों को प्रेम पूर्वक गलती को सुधारने के लिए उनके साथ देना चाहिए जिससे आपका बच्चा अनुशासन आसानी से पालन कर सकेगा।
  • पेरेंट्स बच्चों को उनके जिम्मेदारियों को सही ढंग से सही समय में पूरा करने की हर बात को उनको बताये ताकि बच्चे  और आपके दिये गए काम को सही तरह से कर सकेंगे।
  • पेरेंट्स बच्चों को शुरू से लोगों की रेस्पेक्ट करने की आदत डलवानी चाहिए ताकि बच्चा अपने से बड़े लोगों की रेस्पेक्ट करने में झिझक महसूस न हो। कभी- कभी ऐसा भी होता है कि कुछ बच्चे shy नेचर के होते हैं। और जब उनके घर में कोई मेहमान आते हैं तो उनको नमस्ते या पैर छूने में शर्म करते हैं।
  • पेरेंट्स बच्चों के बीच में डर की दीवार न खड़ी करें। जिससे बच्चे अपने मन की बात आपसे आसानी से शेयर कर सकेंगे।और आपके अनुशासन का पालन भी कर सकेंगे।
  • पेरेंट्स बच्चों को उनके पसंद की चीजों पर ध्यान देना चाहिए और उनके पसंद पर क्या उनकेलिए सही है। क्या गलत है इन बातों को भी समझाए।
  • पेरेंट्स बच्चों के खेलने में कौन सा खेल उनके लिए सही है किस खेल से उनको क्या प्रेरणा मिलती है इन बातों का भी विशेष ध्यान दें।

“माता -पिता जब अपने बच्चों को अनुशासन में रखेंगे तो उनके बच्चे अपने जिम्मेदारियों को समझेंगे ,क्योकि यही वो स्टेज है। जब पेरेंट्स उनको गाइड कर सकते हैं, और बच्चे आपके दिए गए मार्दर्शन पर चल सकेंगे। जिसके हर फैमिली में एक अनुशासित माता -पिता का होना अति आवशक हैं। ”

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