बच्चे के साथ की नयी शुरुआत 

कुसुम वोहरा का एक आम आईटी कर्मचारी की तरह काम करती थीं। करीब 12 साल तक इस तरह काम करने के बाद उनको लगा कि लाइफ में वो भी बहुत कुछ कर सकती हैं। बस यहीं से उन्होंने तिमरी की शुरुआत कर दी। इसके बाद उन्होंने कपडे़, ज्वैलरी और एक्सेसरीज का बिजनेस शुरू इंदिरा नगर बैंग्लोर से शुरू किया। अभी तो एक गार्डन स्टोर का रूप ले चुका है। शहर के अलावा कई देशों में भी इनके कस्टमर हैं। तिमरी के लिए वो कहती हैं कि आॅनलाइन होने वजह से वो कहीं से कभी भी  काम कर सकती हैं।

नौकरी छोड़नी की बात पर उनसे कोई भी सहमत नहीं था। हर किसी को इस बात का डर रहता है कि कहीं हर महीने वाली सैलरी बंद न हो जाए। इतना आसान भी नहीं होता कि नौकरी छोड़कर आप कुछ और शुरू करें। जरूरी भी नहीं है कि उसमें आप सफल हों लेकिन मैंने ठान ली थी कि मुझे कुछ अलग करना है।

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कहती हैं कि उनके पति और भाई दोनों ने नयी शुरुआत में उनका साथ दिया। उस वक्त बच्चा भी छह माह का था। नयी वेंचर की शुरुआत के साथ मैं अपने बच्चे का बचपन भी मिस नहीं करना चाहती थी। मुझे ये पता था कि शुरुआत का दौर क्या होता है। उस वक्त जब वो बाहर जाती थीं तो पति बच्चे का ख्याल रखते थे। दोनों की परिवार और घर की जिम्मेदारियों में बराबर की जिम्मेदारी थी।

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नए बिजनेस के चुनौतियों के बारे में पूछने पर कुसुम कहती हैं कि उनको बच्चे को ज्यादा महत्व देना था। इसके साथ ही जैसे ही बच्चा बड़ा होता वो तिमरी पर ज्यादा फोकस कर सकती हैं।

नयी मां के लिए उनकी क्या सलाह है इस पर कुसुम कहती हैं। अपने आप में सहज रहना जरूरी है। इस दौरान हो सकता है जो काम जब करना है उस वक्त आप न कर पाएं जैसे आप पहले करती थीं। बच्चे के इस दौर को सिर्फ इंज्वाय करें। बाकी सारी चीज इंतजार कर सकती हैं।

 

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