बच्चे के बाद नींद को न करें इग्नोर

नींद हमारे लिए कितनी जरूरी है ये हमस ब जानते हैं। अक्सर देखा गया है कि बच्चे के बाद मांएं पूरी नींद नहीं सो पाती हैं। सोना कितना जरूर है इसके क्या मायने इस बारे में आज जानते हैं। असल में दो तरह की नींद होती है। एक होती है आरइएम यानी रेपिड आई मूवमेंट जिसमें आप सपने देखते हैं और दूसरा नाॅन आरइएम यानी आप सोते हैं नहीं बल्कि आपकी बाॅडी आराम करती है। आपको आसपास के मूवमेंट के बारे में पता चलता रहता है।

नींद की जरूरत

इससे न सिर्फ शरीर को आराम मिलता है बल्कि दिमाग को आराम मिलता है। जब आप सपने के साथ सोते हैं तो दूसरे दिन ज्यादा सोच से भरपूर रहते हैं। इससे आपकी सोचने की क्षमता और अच्छी होती है। वहीं अगर सपने की बिना आप सोते हैं तो हो सकता है कि आपको मेमोरी लैक की समस्या हो। खासकरके इसका असर मां पर होता है। उनके लिए बच्चे को संभालना मुश्किल हो जाता है।

 

 

नवजात का सोना

नवजात के सोने का तरीका एकदम अलग होता है। पहले कुछ महीने में वो आरइएम स्लीप करते हैं। करीब तीन महीने बाद 50 से 80 प्रतिशत वो इसी तरह की नींद लेता है।

 

कैसे करें नींद पूरी

नयी मांएं कोशिश ये करें कि बच्चे के साथ वो भी नैप ले लें। अक्सर बच्चे आधे घंटे या 40 मिनट से ज्यादा नहीं सोते हैं इससे आप भी साथ में जगज ाएगी और खुद को तरोताजा महसूस करेंगी। मां के अलावा हर किसी को दोपहर में झपकी लेनी चाहिए। हां, इस बात का ध्यान रखें कि ये झपकी 2 से 3 बजे की बीच ही हो। उसे देर तक कतई न सोएं।

 

 

रात की फीडिंग

बच्चे को रात में फीडिंग कराने के जगना ही पड़ता है। इससे बचने का सिर्फ एक ही तरीका है कि ब्रेस्ट पंप से मिल्क निकाल कर स्टोर कर लिया जाए। ताकि जब बच्चा जगे तो कोई भी उसको फीड करा दे। इससे किसी की खासकर मां की नींद नहीं खराब होगी।

 

बच्चे को सीखाएं

अक्सर देखा जाता है कि बच्चे रात को जग जाते हैं इसका कतई मतलब नहीं है कि आप उसे बेड से उतार कर घूमाना शुरू कर दें। इस दौरान उसे सुलाने की कोशिश करें इससे वो छह माह का होते-होते छह से सात घंटे तक सोएगा।

 

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