आयुर्वेदा से करें अपने बेबी का केयर

Published On  July 15, 2016 By

आप के अनुसार एक बच्चे से आने वाली गंध कैसी होती है? शायद तेल जो कि आपने मालिश के लिए इस्तेमाल किया हो, या फिर दूध की नरम खुशबू, सोडियम कोकाऐट, सोडियम पाम, ग्लिसरीन, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, पेंटासोडियम पेंटेट और परफ्यूम आदि में से किसी भी तरह की हो सकती है।

हालाँकि, यह सच है कि आप अपने बेबी की जिस भी चीज़ से मालिस करती हैं, वैसी ही खुशबू उसके शरीर से भी आती है। लेकिन मालिश करते समय इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि, आप शिशु की मालिस हल्के हाथों से करें। साथ ही शिशु को नहलाते समय भी खास ध्यान रखें, उसे हल्के गुनगुने पानी से नहाएं और उसके बाद मुलायम तौलिए से सुखाएं। हालाँकि, एक पेरेंट्स होने के नाते आप अपने बच्चे के स्वास्थ्य और उसके चमक के लिए हमेशा शॉपिंग के लिए तैयार रहती हैं।

मैत्री वासुदेव का कहना है कि, यह जरूरी नहीं है कि, जब किसी बच्चे के शरीर से गंध आती है तो वह किसी पार्टिकल पॉवडर की वजह से आती है। बच्चे में खुशबू आने के कई कारण हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने अपने बचपन की कहानी बताईं कि, जब वह चार साल की थी तब उनकी दादी गर्मियों में नाश्ता बनाने के लिए उनकी हेल्प लेती थी। जिसके दौरान, वह कभी क्रिस्प डोसा, इडली, तो कभी स्पाइसी उपमा के मजे लेती थी। इतना सब खाने के बाद वह आम के पेड़ के पास भागती थी, लेकिन दादी भी कम नहीं थीं वह वहां से खींचकर बाथरूम में लाती और गर्म पानी के टब में डुबो देती थीं। उसके बाद वह नीम, तुलसी और हल्दी को पीस कर उस पानी में डाल देती थीं। ठीक पांच मिनट बाद उस पानी से उन्हें निकलने का आदेश देती थीं। साथ ही इतना सब होने के बाद सूरजमुखी, क्रीम और शहद की खुशबू में डूबी होती थी, लेकिन हैरानी की बात की एक भी मधुमक्खी उनके पीछे नहीं होती थी।

साथ ही उन्होंने आज के समय का जिक्र किया, और कहा कि जब आप एक अपार्टमेंट में रहते हो तो आप चारो ओर अन्य फ्लैटों से घिरे होते हैं, ऐसे में आपके नज़र में हरियाली केवल वह लॉन होता है जहाँ आपके बच्चे खेल रहे होते हैं। हालाँकि, यह सच है कि अपने बच्चों को हरियाली दिखाने के लिए उसके दादी या नानी के घर ले जाते हैं। क्योंकि, आयुर्वेदिक स्किनकेयर के लिए मेरी दादी किसी विशेषज्ञ से कम नहीं थीं। साथ ही उन्होंने कहा कि जब हम अपने बच्चे के लिए प्रोडक्ट खरीदने जाते हैं, तो सब से पहले इस बात का ध्यान रखते हैं कि इसमें कोई केमिकल तो नहीं मिला है। साथ ही दुसरे विकल्प को भी साथ लेकर चलते हैं, लेकिन इसके लिए लोगों में जागरूकता होना बहुत जरूरी है।

हालाँकि, आज के समय में अधिकतर लोग अपने स्वास्थ्य और खुशी को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक तरीकों का सहारा ले रहे हैं। कुछ चीज़ें ऐसी हैं जिनसे दूर रहना ही बेहतर है क्योंकि, यह कैंसर के कारण को बढ़ावा दे सकते हैं। खास कर बच्चे के प्रोडक्ट में कोई समझोता नहीं करना चाहिए। तो क्या वास्तव में आयुर्वेद की और बढ़ा जा सकता है? क्योंकि, आयुर्वेदा में ऐसे गुण हैं, जो त्वचा में रक्त परिसंचरण को नियंत्रित करता है। साथ ही पित्त त्वचा के तापमान और जैव रासायनिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। वहीं कफ नमी और मॉइस्चर के स्तर को मोड्यूलेट करता है। एक व्यक्ति में दोष का अनुपात उसके शरीर में मौजूद विशेषता के द्वारा होती है। ऐसे में यदि एक, दो या उससे अधिक दोषों में असंतुलन होता है, तब ऐसे में यह रोग का कारण बनता है। इस स्थिति से उबरने के लिए आयुर्वेद का सहारा ले सकते हैं, जो आपकी हर संभव मदद कर सकता है। इसके लिए आप पास के आयुर्वेदा डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं और अपने लाइफ को हैप्पी बना सकते हैं।

उदाहरण के लिए एक साबुन लें: जेंटल बेबी शॉप लें जिसमें बादाम और जैतून तेल के गुण मौजूद हों, और साथ ही इसमें महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक के तत्व हों। क्योंकि, बच्चे की बॉडी बहुत ही संवेदनशील होती है, ऐसे में उनके त्वचा के लिए आप सनफ्लॉवर, कैस्टर आयल, हनी एंड मिल्क का प्रयोग कर सकते हैं। ऐसे में हिमालया के प्रोडक्ट बच्चे के हेल्दी लाइफ के लिए सबसे बेस्ट है।