“अपने निज़ी जिंदगी में कैसी माँ हैं ” – अनु मेनन उर्फ़ लोला कुट्टी

अनु मेनन को देखकर कोई यह नहीं कह सकता है कि वह एक पांच साल के बच्चे की माँ हैं। आपको बता दें कि यह न केवल एक थियेटर एक्टर थीं बल्कि यह चैनल वी में बेहद सफल वीजे (लोलाकुट्टी शायद आपको याद होगा) और कॉमेडियन थीं। लेकिन, आज यह अपने बेटे अयान की माँ हैं जो उनका अच्छे तरीके से ध्यान रखती हैं। हालाँकि, अनु ने कहा कि “मेरे इनलॉस मेरे साथ हैं क्योंकि मेरे पति हमेशा काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं और मैं पहले से ही मुंबई में पली-बढ़ी हूँ, लेकिन, मैं यह नहीं चाहती हूँ कि मेरा बेटा अपने पापा की तरह गुजराती के जैसा बन जाए, बल्कि मेरी तरह सेंसिबल साउथ इंडियन बनें इसलिए मैं उसका ख्याल रखती हूँ। (अनु ने इन बातों को मजाकिया लहज़े में कहा) ”

इनका स्टैंड-अप रूटीन हमेशा उनके बेटे में एक मिश्रित माता-पिता के रूप में उल्लेख करता है (अनु चेन्नई से मलयाली हैं और उनके पति भले ही रहते मुंबई में हों लेकिन वह एक गुजराती हैं) और दोनों के संस्कृतियों बीच का अंतर है उनका बेटा, जो कि समय-समय पर उनके इस रिश्ते का गवाह बनता है। इस मामले में अनु ने कहा कि “यह पूरी तरह से अलग है, लेकिन मेरे परिवार में, हम पढ़ते हैं, हम नाटकों में जाते हैं, भावनाओं को सुलझाने के लिए विशिष्ट शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, और अपनी बातों को स्पष्ट रूप से कहते हैं। लेकिन, यह (पति) बहुत जोर से बातें करता है, और अपने बिज़नेस की बातें करता है। लेकिन यह बहुत ही शांत और मॉडर्न हैं, मेरे लिए पूरी तरह से खुले हुए हैं।”

अनु के पति, अनिरुद्ध, मर्चेंट नेवी में काम करते हैं और इसलिए, उनके बेटे की पूरी जिम्मेदारी इनके ऊपर ही रहती है। लेकिन, कामकाजी महिला होते हुए भी यह अपने बेटे का बहुत अच्छे से ध्यान रखती हैं और जब वह शो के दौरान ट्रेवल करती हैं तब उनका ध्यान उनके परिवार (इन-लॉ) वाले करते हैं। साथ ही अनु इस बारे में कहती हैं कि “अगर मुझे कोई बैक अप नहीं मिलता है तो मैं आमतौर पर शो छोड़ देती हूं। लेकिन, ट्रेवल करने से पहले मैं सब कुछ अपने बेटे के लिए सेट करके जाती हूँ। जब भी मैं काम के सिलसिले में बाहर जाती हूँ तो अयान का देखभाल मेरे इन लॉ करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पहले के तीन साल उन्होंने नैनी रखा था, लेकिन जब वह घर में होती थीं तब वह अपने बच्चे का ध्यान खुद रखती थीं। इतना ही नहीं वह उन्हें क्लास लेकर जाती थीं, उनके एडमिशन के लिए दौड़ना, बेड टाइम स्टोरी सुनाना, या फिर सामाजिक कार्यों जैसी चीज़ों के बारे में वह उन्हें बताती थीं। अनु ने ये सारी चीज़ें अकेले करती थी क्योंकि उनके पति यहाँ नहीं रहते।

अनु ने कहा कि “मैं हमेशा से कुशल और संगठित रही हूं। खासकर जब आपकी जिंदगी में एक बच्चा शामिल होता है, तब यह और अधिक मुश्किल भरा हो जाता है, लेकिन यह असंभव नहीं है। हालाँकि, वर्किंग होते हुए बच्चे को बड़ा करना बहुत ही मुश्किल है। और इससे भी कठिन आपके लिए तनाव हो सकता है जिसे आप पहचान ही नहीं पाती हैं। ” लेकिन, उन्होंने इसके लिए भी कुछ ऐसे टेक्निक ढूंढ ही लीं।

खुद के लिए समय

वह चाहती हैं कि उन्हें भी अपने लिए समय मिले, लेकिन शायद यह बहुत ही मुश्किल है। इन्होंने कहा कि “यह नॉन-नेगोशिएबल है। कभी-कभी मन करता है अपने दोस्तों से मिलूं, अपनी पसंदीदा किताबें पढूं लेकिन यह सब मुमकिन नहीं है। मुझे नेटफ्लिक्स पर कॉमेडी देखना बहुत अच्छा लगता है। इन्होंने कहा कि मुझे अपने लिए कुछ समय चाहिए। ताकि मैं यह समझ सकूं कि मुझे अपने बच्चों के सामने कैसे रहना है। मैं निश्चित रूप से उनकी मां हूं, लेकिन यह सब मैं नहीं हूं। “

हेल्प की जरूरत

मैं वो सारा काम खुद से और अकेले करती हूँ, क्योंकि मेरे पति काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। फिर मुझे एहसास हुआ कि अगर मैंने सब कुछ खुद से किया तो मैं कभी भी काम पर वापस नहीं लौट पाऊँगी। इसलिए, मैंने शुरुआत के तीन वर्षों के लिए एक अच्छी नैनी खोजने में निवेश किया था। क्योंकि, अयान को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी; साथ ही उन्होंने कहा कि जब ग्रैंडपैरेंट्स इसकी मदद करते हैं तब मैं मना नहीं करती हूँ। ”

 अपने बच्चे को साथ ले जाएं

अनु ने कहा, कि बच्चों के लिए यह अच्छा है कि उनके पेरेंट्स उनके साथ रहें। “मेरे लिए जहां तक संभव होता है, मैं उसे साथ लेकर जाती हूँ। हालाँकि, यह बच्चे के लिए अच्छा है कि वह अपनी माँ को किसी और भी रूप में देखे।” इसके अलावा, वर्किंग माँ के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह कैसे इन सारी चीज़ों को मैनेज करती हैं।

अपनी मातृभाषा में बात करें

यह बाइलिंगुअल परिवार के लिए एक बेहतर टिप्स है। “ऐसा नहीं है कि मेरा बेटा बड़ा होने पर मेरे मदर टंग को लेगा, बल्कि इसके लिए आपको उसके साथ इन्हीं भाषा में बात करना होगा। यह वास्तव में बहुत ही अजीब है क्योंकि अब वह थोड़ा मलयालम पढ़ने लगा है, अगर वह कुछ कहना चाहता है तो उसके दादा-दादी उसकी बातों को नहीं समझ पाते हैं। जो कि काफी मजेदार लगता है। लेकिन, यह सच है कि उसे अपनी विरासत से जुड़े रखने का यह एक शानदार तरीका है।”

There are no perfect parents, only real ones.
Anmol Tum : Real parents’ journeys from all walks of life, Brought to you by Teddyy’s Diapers. Made for Indian Moms

Feature Image Source: Indiatoday, Fireflydaily

loader