अकेले पिता के लिए बेटी का पहला पीरियड

पढ़ने में अज़ीब लग रहा होगा, लेकिन घबराइए नहीं आप एकदम सही पढ़ रहे हैं। हम बात कर रहें हैं बेटी के पहले पीरियड की। ये लेख उनके लिए बहुत मतलब का है, जो सिंगल फादर हैं। उनके साथ बढ़ती बेटी को लेकर ये कश-म-कश लगी रहती है  कि बेटी के पीरियड को कैसे हैंडल करें। हालही में आयी फिल्म पीकू भी इस बारे में बहुत कुछ सिखाती है। पीकू के पिता को अपनी बेटी के अफेयर से लेकर फिज़कल रिलेशन तक की जानकारी होती है। इसका ये कतई मतलब नहीं होता की पिता , बेटी दोनों एक दूसरे की इज़्जत कम करते हैं। दोनों एक दूसरे की भावना और जरूरतों को कम समझते हैं।  कुछ छोटे और आसान तरीकों से इस समस्या से आसानी से निपटा जा सकता है। बस थोड़ी समझदारी दिखाएं और पिता होने का पूरा फर्ज निभा दें।

खुलकर बात करना जरूरी

मनीष कहते हैं कि बेटी को जन्म देते ही उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया। उसके बाद बेटी की सारी जिम्मेदारी उनपर आ गयी। पत्नी के मौत के बाद उन्होंने शादी इसलिए नहीं की, कि कहीं सौतली मां बेटी से दुव्यहार न करे। बेटी की परवरिश में उनको कुछ दिक्कतें तो आयीं, मगर उनको बात करके सुलझा लिया। बेटी को पालते वक्त उन्होंने इस बात का पूरा ख्याल रखा कि वो हर बात उनसे शेयर कर सके। बेटी के साथ सिर्फ पिता और बेटी का नहीं बल्कि दोस्त, मां और बहन का भी रिश्ता रखा। कहते हैं कि मेरी बेटी हर बात मुझसे शेयर करती है।

Untitled design (26)

 

Image source 

नजर रखें बदलाव पर

पिता होने के नाते पीरियड पर बात करना थोड़ा मुश्किल है मगर नामुमकिन नही है। 8-13 साल की लड़कियों में पीरियड शुरू हो जाता है। इसके पहले उनमें थोड़ा शारीरिक बदलाव भी आता है जैसे अंडर आर्म में प्यूबिक हेयर, बे्रस्ट भी इंक्रिज होता है। ये वो समय होता जिसके 15 से 18 महीने के भीतर पीरियड आ जाता है।आप अगर बेटी के पिता हैं, तो ये सही समय है जब बेटी को पीरियड के बारे में थोड़ी जानकारी दें।

डाॅक्टर की सलाह

शारीरिक बदलाव के दौरान ही आप किसी गायनोक्लाॅजिस्ट से भी संपर्क कर सकते हैं। बेटी को संकेत देने के साथ ही आप उसे किसी गायनोक्लाॅजिस्ट भी मिलाएं। इसके पहले खुद डाॅक्टर को ये बता दें कि आप सिंगल फादर हैं और बेटी के पीरियड के बारे में उसे बताना चाहते हैं। इस दौरान डाॅक्टर भी बेटी को मेडिकल चेकअप और हेल्थ से जुड़ी सारी जानकारी दे देगी। कई बार पहले पीरियड में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, कमर दर्द और पेट दर्द की समस्या आती है। ऐसे में डाॅक्टर से मिलवाकर कहीं न कहीं बेटी की बहुत मदद हो जाएगी।

Untitled design (27)

महिला रिश्तेदार की मदद

बेटी से हर बात करें, जितना हो सके खुल कर उसे बताएं कि पीरियड क्या है। इसमें शर्माने या संकोच करने की जरूरत नहीं है। पीरियड का कोई समय या दिन निर्धारित नहीं होता है। वो कहीं भी , कभी भी आ सकता है। ऐसे में स्कूल और काॅलेज अगर बेटी बिना तैयारी के जाएगी तो शायद उसे शर्मिंदा होना पड़े। जोकि उसको सदमे में भी डाल सकता है। इसलिए आप उसे दूसरे के सामने शर्मिंदा होने से बचाएं और खुद उसको इसके बारें बता दें। कोई किताब उसे दें जिसमें इसके बारे में लिखा हो। इसके अलावा किसी महिला रिश्तेदार या दादी , नानी का सहारा लिया जा सकता है।

लाकर रखें जरूरी चीजें

पीरियड की तैयारी पहले से करें। लेडीज स्टोर में जाने से हिचकिचाएं नहीं। वहां जाकर सेनेटरी पैड, पैंटी लाइनर जैसी चीजें लाकर रखें। कोशिश करें कि सारी चीजें उसके ड्रावर और बाथरूम में रखें। इस दौरान इस बात का ध्यान रखें कि पैक पर इस्तेमाल का इंस्ट्रक्शन दिया हो। इससे बेटी को इस्तेमाल करने में दिक्कत नही होगी।

 

Featured image 

loader