ऐसे 4 तरह के बच्चे ज्यादा होते हैं कुपोषण के शिकार !

जानकारी ही कुपोषण से बचाव | Jankari hi kuposhan se bachaw

आज के समय में बच्चों में कुपोषण की समस्या बहुत गहरी होती जा रही है। हालाँकि, इसका सबसे बड़ा कारण बच्चों में उचित पोषक तत्वों को न मिल पाना होता है। क्योंकि, शरीर को पर्याप्त पोषण ना मिल पाने के कारण शरीर के ज़रूरी अंग ठीक तरीके से काम नहीं करते और बच्चें को बीमारियां होने लगती है।अगर देखा जाए कुपोषण कोई बीमारी नहीं, लेकिन कुपोषण के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और वे बहुत सी बिमारियों के शिकार हो जाते हैं।

कुपोषण से पीड़ित बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है और ऐसे बच्चों में एकाग्रता की भी कमी होती है।

ऐसे में उन बच्चों की बात की जा रही है, जिनमें सबसे अधिक कुपोषण का खतरा रहता है, जिनमें निम्न शामिल हैं-

बच्चों में पोषक तत्वों की कमी

बच्चों के खाने में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेटस, विटामिन्स, मिनरल्स जैसे पोषक तत्व होना भी बहुत जरुरी है। क्योंकि इन पोषक तत्वों की कमी से ही कुपोषण होता है। इसलिए बच्चें को कुपोषण के बचाने के लिए अनाज, दालें, हरी सब्जीयां, सलाद, दूध और मौसमी फल ज़रूर दे।

पेरेंट्स में जानकारी का अभाव

कुछ पेरेंट्स ऐसे होते हैं, जिन्हें इस बात का पता नहीं होता है कि बच्चों के समुचित विकास के लिए उनके आहार में किन चीजों को शामिल किया जाना चाहिए। क्योंकि, जानकारी के अभाव में वह अपने बच्चों को ऐसी चीजें खाने के लिए देती हैं जिसका प्रोटीन और विटामिन से कोई सरोकार नहीं होता है।

समय से पहले बच्चे का जन्म

ऐसे बच्चे जो समय से पहले पैदा हो जाते हैं, वह भी जन्म से ही कमज़ोर होते हैं, क्योंकि उनका पूरा विकास नहीं हो पाता है। ऐसे बच्चों को शुरूआती सालों में सामान्य बच्चों से ज्यादा देखभाल की आवश्यकता होती है। यदि थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए तो ऐसे बच्चें कुपोषण के शिकार बहुत जल्दी हो जाते हैं।

बीमारी की समस्या

ऐसे बच्चे, जिन्हें पेट से समबन्धित या सिसिटक फाइब्रोसिस जैसी बिमारियों की शिकायत रहती हो, ऐसे बच्चों को भूख नहीं लगती। जिस कारण उन्हें सही पोषण भी नहीं मिल पाता और वह कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।

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