26 जनवरी के 4 नायाब सच

26 जनवरी भारत के लिए सबसे अहम दिन माना जाता है , क्योंकि इस दिन भारत का सविधान लागू हुआ था। उसी दिन से हमारा भारत एक सम्पूर्ण, प्रमुख समाजवादी, लोकतंत्रात्मक, पंथनिरपेक्ष गणराज्य बन गया। और इस दिन से भारत में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो हमारे इतिहास के स्वर्णिम पलो में शामिल है। इसके अलावा, भी कई ऐसी बातें हैं जो इस दिन को और भी खास बनाती है, जिनमें निम्न शामिल हैं-

संविधान का निर्माण

26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू किया गया था। हमारे देश का संविधान बनाने में भीमराव अंबेडकर की अहम भूमिका थी। हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया। इससे पहले भारत में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट (1935) लागू था। इसी वजह से हम हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। ये राष्ट्रीय त्योहार हमारे देश के लिए गर्व का प्रतीक है और यह देशभक्ति की भावना से जुड़ा है।

पहले राष्ट्रपति की शपथ

26 जनवरी 1950 के दिन डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। दिल्ली के गवर्नमेंट हाउस में बने दरबार हॉल में उन्होंने शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने इरविन स्टेडियम में देश के राष्ट्रीय ध्वज को फहराया था और परेड की शुरुआत हुई थी।

बहादुरी का पुरस्‍कार

इस दिन देश की रक्षा में खुद के प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को राष्ट्रपति कीर्ति चक्र, अशोक चक्र और परमवीर चक्र से सम्मानित करते हैं। इसके अलावा अपनी अद्भुत वीरता और साहस दिखाने वाले बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिया जाता है।

बीटिंग रीट्रिट

29 जनवरी को ”बीटिंग रीट्रिट” होता है, जो गणतंत्र दिवस के समापन का प्रतीक होता है। इसका आयोजन विजय चौक पर होता है, जिसमें देश की तीनों सेनाएं प्रदर्शन करती हैं।

इसके अलावा, हमारा देश का लोकतंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सुमार है।

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