Easy Tips


क्या आपका बच्चा लिखने से कतराता है?

 

गर्मी की छुट्टियां शुरू हो गयी है और घर में बैठे बैठे बच्चों का मन बहलाना मुश्किल हो गया है. उस पर अगर बच्चे बाल विहार (प्रीस्कूल) से प्राथमिक कक्षा में जा रहे हो, तो माँबाप पर और जिम्मेदारी बढ़ जाती है, क्योंकि इसके आगे बच्चे ज़्यादा समय स्कूल में बिताएंगे। इसका मतलब ये भी कि है कि बच्चों पर लिखने का तनाव बढ़ने वाला है. प्रीस्कूल के बच्चों में हम लिखने के काफी मज़ेदार बहाने देख चुके है, हाथ में दर्द है, पेट में दर्द है, बारबार पेंसिल गिरती है, पेंसिल नुकीली नहीं है, या ज़्यादा ही नुकीली हैये सूची तो चलती ही रहेगी.

 

पर इसमें सोचने वाली ये बात है कि बच्चे ये बहाने क्यों बनते है? क्या इसका कारण हम है? क्या हम ही अनजाने में बच्चों में लिखने की तरफ नकारात्मक दृष्टिकोण है? बच्चे बड़े ही संवेदनशील होते है, और वो तुरंत हमारी नकारात्मकता महसूस कर लेते है. पर इसमें नुकसान तो बच्चों का ही है. है ?

 

बच्चों में लिखने के प्रति उत्साह जगाने के लिए ये तरीके आज़माएं जा सकते है:

 

१. अपनी आवाज़ और हाव-भाव में उत्साह दिखाएँ: अपने और बच्चे की बीच के रिश्ते और बिताए गए पलों को ध्यान में रखते हुए लिखने के प्रति उत्साह दिखाये. हो सकता है की बच्चे तुरंत उत्साह दिखाए, पर आप अपना उत्साह कायम रखे.

२. स्क्रैपबुक करें: कुछ वक़्त निकालकर पुराने अखबार और मासिकों में से कुछ चित्र चुनकर निकालें जो बच्चों के आस पास हो. उदाहरण के तौर पर, बेबी. अब आप बेबी से सम्भन्धित और शब्द लिखवा सकते है, जैसे मम्मी, पापा, pram. इस खेल में और मज़ा लाने के लिए बच्चों से आपके नाम लिखवाएं। अपने बच्चे से बातें करें, और हो सकता है कि वो खुद और शब्द लिखना चाहें। आप उनके पसंदीदा कार्टून के पात्रों के चित्र भी उन्हें दिखा सकते है.

३, उनके सामने एक लक्ष्य रखें: अगर आपका बच्चा फ्रोजेन का फैन है, तो आप उनको कह सकते है की अगर आप आना और एल्सा के नाम लिख सकेंगे तो हमलेट इट गोगाना लिखेंगे. कहने का मतलब ये है की अपने बच्चों की पसंदनापसंद को ध्यान में रखते हुए उनको लिखने में प्रोत्साहित करें.

४. जल्दी न करें. लिखने की आदत डलवाने में आप जल्दी करें. छुट्टियाँ चल रही है, जल्दी क्या है? धीरेधीरे मज़े लेलेकर लिखवाने का प्रयास जारी रखें।

५. लिखने की मिसाल बने. अगर बच्चे आपको लिखते हुए देखते है, तो वह भी उसे एक सामान्य गतिविधि समझेंगे और उसका विरोध करना बंद कर दे।अगर आप को लिखने बिलकुल भी पसंद नहीं है, तो भी उसे बच्चों के सामने व्यक्त करें।

६. अंग्रेजी के “प्रिंटिंग” पर ही ज़ोर दें. फिलहाल अंग्रेजी के प्रिंटिंग लेखन शैली पर ज़ोर दें, ये शैली आसान है. जब बच्चों को लिखने में आनंद आने लगे तब स्कूल के साथ साथ आप भी प्रवाही लेखन यानि कर्सिव राइटिंग सिखाना शुरू करें।

 

सौ बातों की एक बात, हमेशा याद रखें कि किसी भी तरकीब की कामयाबी उसकी स्थिरता में है. ऊपर बतायी गयी तरकीबें में अपनी ही बच्ची पर आज़मा चुकी हूँ और काफी हद तक कामयाब भी रही हूँ। अपनी रचनात्मकता और बच्चे की तयारी पर विश्वास रखें और आगे बढ़ते रहे

 

Published On  April 29, 2016 By