बेबी की अनकही बोली

गर्भ में ही बच्चे अपने पेरेंटस को महसूस करते हैं। उनकी बात को समझते हैं। जन्म के बाद जब बच्चे को बोलना होता है वो समय उनके जीवन का बहुत खास पड़ाव होता है। इस दौरान पेरेंटस को भी बहुत मेहनत करनी पड़ती है। यहां हम बात कर रहें हैं कि बच्चों को कैसे जाने कि और क्या सीखाएं जब वो बोलना शुरू करें।

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जन्म के तीन महीने बाद

जब बच्चा तीन महीने का हो जाता है उस वक्त वो आपकी बातों को समझता और महसूस करता है। अक्सर देखा जाता है कि वो आपको सुनकर गिलगिलाता या जोर- जोर से हंसता नजर आता है।

  1. – बच्चे के लिए गाएं और बात करें, ऐसा लोग जन्म के पहले भी करते हैं ताकि बच्चे से उनकी बाॅन्डिग बनें। कई अस्पताल में पैरेंटस को बोला जाता है कि प्रेगनेंसी के दौरान ही बच्चे से बातें करें।
  2. – किसी और से बातें करें जब वो आपके पास हो। बच्चा आपके शब्द नही समझता है मगर उसे आपकी आवाज और मुस्कान अच्छी लगती है। वो आपको और दूसरे को बात करता देखकर खुश होगा।
  3. – बच्चे के लिए शांति का माहौल भी जरूरी है। जब बच्चे को मौका मिले बिना शोर के भी खेलने दें। इससे वो ज्यादा बोलने की कोशिश करेगा।

छह से नौ माह की बीच

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Mamta with her Son Vedansh

इस बीच बच्चा साउंड को समझता है और उसे मज़ा आता है। इस दौरान बाबा और दादा जैसे शब्द वो आसानी से पकड़ते हैं। ध्यान देने पर पता चलता है कि इस वक्त बच्चे हैप्पी वाइस को सुनकर खुश होते हैं और कोई नाराज या दुखी है तो रोना भी शुरू कर देते हैं। इसके अलावा अगर कोई तेज़ आवाज़ में बात करता है तो उनको डर भी लगता है।

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