Dinner Conversations


अकेली हैं तो क्या गम है

अकेले रहने का शौक किसी को नहीं होता है। स्थिति और नियति की चलते कई मांएं ऐसी हैं, जो अकेले बच्चे की परवरिश के लिए मजबूर होती हैं। बच्चे के साथ थोड़ी तस्सली तो मिलती है मगर इतनी लंबी जिदंगी को अकेले काटने में कई कठनाईयों का सामना भी करना पड़ता है। जीवन के किसी मोड़ एक साथी की जरूरत सबको पड़ती है। औरतें इस जरूरत को नकार देती हैं, अधिकतर तो इसलिए की दुनिया या समाज क्या कहेगी। वहीं कुछ परिवार के दबाव में रहती हैं और चाहकर भी दोबारा जीवनसाथी के बारे में नहीं सोच पाती हैं। यहां एक बात कहना जरूरी है कारण कुछ भी हो मगर साथी की जरूरत कम नहीं होती है। कोई दबी जुब़ान से इसे मानता है तो कोई अकेले में सिसकियां भर के कुबूल कर लेता है। सिर्फ शारीरिक सुख के लिए नहीं जीवन का दुखसुख बांटने के लिए किसी अपने का साथ जरूरी होता है। ऐसा आसान नहीं है मगर ऐसा सोचना भी बुरा नही है। एकबार इस तरह सोचकर देखिए की अगर पत्नी की जगह पति अकेला होता तो क्या वो भी अकेले ही जीवन बिताता???

वजह को पीछे छोड़कर आगे बढे़

अकेले होने की वज़ह कोई भी हो, पति की मृत्यु हो गयी हो या फिर तलाक हो गया। दोनों की बहुत ही कष्टदायी स्थिति है। डिप्रेशन, टेंशन और भविष्य की चुनौतियां लोगों का कंपा देती हैं। बच्चे की जिम्मेदारी के साथ जीना भी बहुत जरूरी है। इसके लिए उस वजह के बारे में सोच कर खुद को तकलीफ देना बंद करें और बेहतर जि़दंगी के बारे में सोचें। अब वो वक्त नहीं रहा जब अकेले ही सबकुछ करना संभव होता है।

क्यों जरूरी है किसी का साथ

भले आप खुद कितनी भी अच्छी पोस्ट पर हों। अच्छी तनख़्वाह पा रही हैं मगर मानसिक तौर पर आप अकेली हैं। नीरा कहती हैं कि शादी को सिर्फ चार हुए थे और दो बच्चे थे। पति की अचानक एक दुर्घटना में मौत हो गयी। मेरे परिवार वालों ने तो कहा कि दूसरी शादी कर लूं मगर ससुराल के लोगों का मन नहीं था। सच कहूं तो उस वक्त मुझे भी लगा कि दुनिया और समाज क्या कहेगा। फिर अकेले ही बच्चों को पाला, दोनों बेटों की अकेले परवरिश की। उनकी शादी हो गयी सब अपनेअपने जीवनसाथी के साथ हैं। अच्छा लगता है मगर कहीं न कहीं मुझे मेरे पति की कमी हमेशा खली है। शायद दुनिया और समाज के बजाय खुद की जरूरतों समझा होता तो ज्यादा आसानी से सब कुछ कर पाती।

सोच बदलें क्योंकि बदलाव ही सही है

इतिहास भी गवाह है कि पुर्नविवाह कोई अपराध नही है। आज हम विदेशी कल्चर की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। फिर चाहे वो उनकी लाइफ स्टाइल हो या फिर डेªसिंग सबकुछ के हम कायल हैं। फिर दोबारा से डेटिंग में क्या दिक्कत है ? राजाराम मोहन राय ने कई साल पहले हर ओर प्रयास किया था। वे सफल भी हुए थे फिर भी हमारे देश में आज भी औरतों के लिए इस बारे में सोचना भी अपराध है। हम फेसबुक, ट्वीटर, व्ह्ाटस एप और स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हैं फिर अपनी सोच क्यूं नहीं बदल सकते है।

Featured image Eshna sharma with her Mom

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